सिटी पोस्ट लाइव
बिहार विधानसभा चुनाव के लिए तारीखों की घोषणा अभी नहीं हुई है, लेकिन बेगूसराय जिले के 7 विधानसभा सीटों में से एक मटिहानी विधानसभा सीट को लेकर घमाशान जारी है। 2020 के विधानसभा चुनाव में यहां से तस्कर सम्राट के नाम से चर्चित नयागांव के रहने वाले कामदेव सिंह के बेटे राजकुमार सिंह ने लोजपा के टिकट पर चुनाव लड़ा और मात्र 333 वोट से जीत हासिल की थी। चुनाव जीतने के बाद वे जेडीयू में चले गए और अभी विधानसभा में सत्तारूढ़ दल के सचेतक हैं। राजकुमार सिंह और जदयू का दावा है कि यह हमारी सिटिंग सीट है।
2020 में राजकुमार सिंह ने लोजपा के टिकट पर जीत हासिल की थी। उस वक्त उन्होंने जदयू के प्रत्याशी को हराया था और पूरे बिहार में लोजपा को एकमात्र सीट पर यहीं जीत मिली थी। इसलिए लोजपा का इस सीट पर दावा है। जिला परिषद की पूर्व अध्यक्ष इंदिरा देवी क्षेत्र में पूरी तरह से एक्टिव हैं। इंदिरा देवी ने पिछले रविवार को पार्टी के कार्यकर्ताओं के साथ मीटिंग भी की थी। मीटिंग में इंदिरा देवी ने कहा था कि मटिहानी विधानसभा की सीट जदयू तो 2020 में हार चुकी है। इसलिए यह सीट लोजपा को ही मिलना चाहिए। एनडीए की स्थिति यह है कि जदयू और लोजपा दोनों अपना सीट पर दावा कर रहे हैं।
जेडीयू के जिला प्रवक्ता अरुण महतो ने कहा कि एनडीए घटक दल के पांचों दल के शीर्ष नेतृत्व ने वहां से जदयू को प्रत्याशी के तौर पर रखा है। मटिहानी विधानसभा क्षेत्र में एनडीए का कार्यकर्ता सम्मेलन हो रहा है, उसका पूरा मैनेजमेंट मटिहानी के जदयू विधायक राजकुमार सिंह ही कर रहे हैं। बोगो सिंह चार बार चुनाव जीते, जिसमें दो बार जदयू ने उन्हें समर्थन किया था और दो बार टिकट दिया था, चारों बार वह जीते। इस बार भी वहां से जदयू ही हर हाल में चुनाव लड़ेगी। सीट शेयरिंग का फार्मूला तय हो चुका है।
महागठबंधन की स्थिति भी इससे बेहतर नहीं है। 2020 के चुनाव में मटिहानी विधानसभा सीट पर महागठबंधन ने सीपीआई (एम) के राजेंद्र प्रसाद सिंह को चुनाव मैदान में उतारा था। वे 765 वोट से हारकर तीसरे नंबर पर रहे थे। अब जब 2025 विधानसभा का चुनावी साल है तो वामपंथ के नेता लगातार मटिहानी सीट पर अपना दावा कर रहे हैं। मटिहानी के चार बार विधायक रह चुके नरेंद्र कुमार सिंह उर्फ बोगो सिंह बीते दिनों तेजस्वी यादव से मिलकर राजद में शामिल हो गए हैं। बोगो सिंह राजद के सिंबल पर मटिहानी से चुनाव लड़ने की तैयारी शुरू कर चुके हैं हालांकि जब सीट शेयरिंग नहीं हुआ तो कोई प्रत्याशी सिर्फ दावा कर रहे हैं। लेकिन बोगो सिंह पूरे तन मन धन से मटिहानी से चुनाव लड़ने के लिए तैयार हैं। सूत्रों के मुताबिक, अगर महागठबंधन की सीट शेयरिंग में मटिहानी राजद के कोटे में नहीं आती है तो बोगो सिंह निर्दलीय भी मटिहानी विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ सकते हैं।
सीपीआई (एम) का कहना है कि मटिहानी से वह पिछली बार चुनाव लड़ी थी। अंतिम तीसरा राउंड में उसका प्रत्याशी हार गया था। लेकिन ये सीट वह किसी के लिए नहीं छोड़ेगी। मटिहानी से कांग्रेस भी दावा कर रही है। महागठबंधन से कांग्रेस भी मटिहानी सीट पर दावा कर रही है। कांग्रेस का दावा है कि NSUI के राष्ट्रीय प्रभारी कन्हैया कुमार के गृह क्षेत्र बेगूसराय में दो सीट कांग्रेस को मिले। एक सीट बेगूसराय सदर से अमिता भूषण का नाम लगभग तय है तो मटिहानी पर भी कांग्रेस का दावा है। यहां सबसे प्रबल दावेदार जिलाध्यक्ष अभय कुमार सिंह सार्जन हैं। इसके लिए सार्जन पटना से लेकर दिल्ली तक अपना सेटिंग कर रहे हैं।
बेगूसराय शहर से सबसे नजदीक का विधानसभा रहने के कारण जन सुराज में भी यहां टिकट के लिए मारामारी की स्थिति है। यहां से टिकट के लिए जिले के चर्चित हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ। रंजन चौधरी मतदाताओं का दिल टटोलने के बाद पूरी तैयारी में हैं। जन सुराज के सूत्रधार प्रशांत किशोर के करीब पहुंच चुके हैं। डॉ। रंजन चौधरी की क्षेत्र में तेज होती गतिविधि और जन सुराज के कार्यक्रम में तन मन धन से सहभागिता को लेकर इनका टिकट मटिहानी से तय माना जा रहा है। हालांकि जन सुराज में दो और प्रबल दावेदार टिकट के लिए पार्टी के सूत्रधार यानी प्रशांत किशोर तक पहुंच बना चुके हैं। इनमें से एक सुप्रीम कोर्ट के वकील कुशेश्वर भगत हैं, जबकि दूसरे दावेदार मटिहानी के प्रखंड उप प्रमुख सुधांशु कुमार हैं। कुल मिलाकर एनडीए, महागठबंधन और जन सुराज तीनों में मटिहानी विधानसभा क्षेत्र से टिकट होने के लिए मारामारी की स्थिति है।
मटिहानी विधानसभा क्षेत्र 1977 में अस्तित्व में आई थी, लेकिन इससे पहले 1957 में आम चुनाव के समय मटिहानी के कारण बेगूसराय देश स्तर पर चर्चित हुआ था। जब देश में चुनाव के दौरान बूथ लूट की सबसे पहली घटना यहां हुई थी। 1957 में देश में दूसरा आम चुनाव हो रहा था तो तात्कालीन बेगूसराय विधानसभा क्षेत्र में कांग्रेस के उम्मीदवार सरयुग प्रसाद सिंह और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के उम्मीदवार चंद्रशेखर सिंह के बीच आमने-सामने का मुकाबला था।चुनाव के दिन सभी जगह शांतिपूर्ण तरीके से मतदान चल रहा था। रचियाही कचहरी बूथ पर चार गांव रचियाही, आकाशपुर, राजापुर और मचहा के लोग मतदान करने आ रहे थे। इसी बीच अचानक लाठी और हथियार से लैस 20-25 लोगों ने राजापुर और मचहा के मतदाताओं को रास्ते में मतदान केंद्र पर जाने से रोक दिया। मतदान केंद्र पर मौजूद मतदाताओं को भी भगा दिया गया था।इसके बाद एक पक्ष के समर्थक ने मतदान केंद्र पर कब्जा कर जमकर फर्जी वोटिंग की। इस दौरान दो पक्षों में तनाव भी हुआ, लाठी-डंडे भी चले। ग्रामीणों के जबरदस्त विरोध पर बूथ लूटने वाले तत्वों ने एक मतपेटी कुआं में फेंक दिया था। उस समय बूथों पर पुलिस की व्यवस्था नहीं थी और शिकायत भी नहीं दर्ज हो सका। बाद में इसकी गूंज पूरे देश में हुई थी।