बिहार में मंत्री बनाम नौकरशाही: विजय सिन्हा के जन संवाद से हड़कंप, राजस्व अधिकारियों ने सीएम नीतीश को लिखा पत्र…

Ritu Raj

सिटी पोस्ट लाइव
बिहार के उपमुख्यमंत्री सह राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री विजय कुमार सिन्हा के आक्रामक जन संवाद कार्यक्रमों ने राजस्व विभाग में भूचाल ला दिया है। मात्र तीन जिलों – पटना, मुजफ्फरपुर और पूर्णिया – में आयोजित जन संवाद में अधिकारियों पर सख्त टिप्पणियां और तत्काल कार्रवाई की शैली से नाराज बिहार राजस्व सेवा संघ (BiRSA) ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को खुला पत्र लिखकर कड़ा विरोध जताया है। संघ ने मंत्री की कार्यशैली को ‘तमाशाई शासन’ और ‘मॉब जस्टिस’ करार देते हुए सार्वजनिक अपमान बंद करने की मांग की है, अन्यथा सामूहिक बहिष्कार की चेतावनी दी है।

संघ के अध्यक्ष आनंद कुमार और महासचिव सौरभ कुमार द्वारा हस्ताक्षरित तीन पन्ने के पत्र में आरोप लगाया गया है कि मंत्री जन संवाद के नाम पर अधिकारियों को सार्वजनिक मंचों पर अपमानित कर रहे हैं। ‘खड़े-खड़े सस्पेंड कर देंगे’ और ‘यहीं जनता के सामने जवाब दो’ जैसे बयान संवैधानिक मर्यादा, सेवा नियमों और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के खिलाफ हैं। संघ ने इसे ‘ड्रमहेड कोर्ट मार्शल’ जैसा बताया और कहा कि लोकप्रियता के लिए प्रशासनिक प्रक्रियाओं को दरकिनार किया जा रहा है।

पुश नोटिफिकेशन के लिए सब्सक्राइब करें।

पत्र में संघ ने तर्क दिया कि बिहार में भूमि विवाद दशकों पुरानी संस्थागत समस्या हैं, जिनकी जड़ें पिछले दो दशकों की एनडीए सरकारों में भी हैं। केवल वर्तमान अंचल अधिकारियों (सीओ) को दोषी ठहराना अन्याय है। अधिकारियों के पास पर्याप्त स्टाफ, वाहन, पुलिस सहयोग और संसाधन नहीं हैं, फिर भी वे आपदा प्रबंधन, चुनाव ड्यूटी और अन्य कार्य निभा रहे हैं। डिजिटलीकरण में 90% सफलता के बावजूद केवल 10% जटिल मामलों के लिए पूरे संवर्ग को बदनाम करना गलत है।

संघ ने संविधान के अनुच्छेद 14 और 21 का हवाला देते हुए कहा कि बिना विधिवत जांच के सार्वजनिक दंड संवैधानिक नहीं है। सवाल उठाया गया कि क्या ऐसी ‘जन अदालतें’ पुलिस, स्वास्थ्य या अन्य विभागों के लिए भी होंगी? लगातार अपमान से अधिकारियों का मनोबल गिर रहा है, जिससे प्रशासनिक दक्षता प्रभावित हो सकती है। मांग की गई है कि निगरानी केवल कानूनी प्रक्रियाओं से हो और नीतिगत समस्याओं पर गंभीर चर्चा की जाए।

इस बीच, उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा ने पत्र पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि उन्हें कोई पत्र नहीं मिला और सुधार से घबराने वाले ही विरोध कर रहे हैं। भूमि माफिया, दलालों और फर्जी दस्तावेजों के खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी रहेगी। अराजकता बर्दाश्त नहीं की जाएगी और गलत काम करने वालों पर एक्शन तय है।

यह विवाद बिहार की राजनीति और प्रशासन में नई हलचल पैदा कर रहा है। जनता भूमि विवादों के त्वरित निपटारे की सराहना कर रही है, लेकिन नौकरशाही में असंतोष बढ़ रहा है। मुख्यमंत्री कार्यालय से अभी कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। देखना यह है कि नीतीश कुमार इस टकराव में कैसे हस्तक्षेप करते हैं।

Share This Article