सिटी पोस्ट लाइव : पूर्णिया सांसद पप्पू यादव के बेटे सार्थक रंजन विधान सभा चुनाव में चौके-छक्के लगाते नजर आ सकते हैं.क्रिकेट के मैदान में बाउंसर आ रही गेंद पर भी छक्का मरनेवाले सार्थक रंजन किसी मॉडल से कम नहीं है. फिटनेस के साथ साथ अपने बल्ले के जरिए भी वो लोगों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित करते नजर आ रहे हैं. आजकल दिल्ली प्रीमियर लीग में शानदार बल्लेबाजी से चर्चा का विषय बने हुए हैं.
पूर्णिया के सांसद और बिहार के चर्चित नेताओं में से एक, पप्पू यादव का बेटा सार्थक रंजन एक क्रिकेटर है. वह इन दिनों क्रिकेट के मैदान पर अपने जलवे बिखेर रहे हैं. अपनी फिटनेस और स्टाइलिश लुक की वजह से वह किसी मॉडल से कम नहीं दिखते हैं. लेकिन सिर्फ लुक्स ही नहीं, उनका बल्ला भी मैदान पर खूब बोलता है.वह आजकल दिल्ली प्रीमियर लीग में नॉर्थ दिल्ली की तरफ से बल्लेबाजी करते हुए दिखाई दे रहे हैं. उन्होंने अब तक दो अर्धशतकीय पारी 60 गेंदों में 82 रन और 50 गेंदों में 77 रनों की धमाकेदार खेल अपनी टीम को जीत दिलवाई. सोनी टीम के मजबूत बैट्समैन के तौर पर उनकी गिनती होती है.
सार्थक ने शुरुआत में दिल्ली की टीम के लिए टी-20 और लिस्ट-ए मैच खेले. 2016 में उन्होंने टी-20 में डेब्यू किया और 2017 में विजय हजारे ट्रॉफी के दौरान लिस्ट-ए डेब्यू किया. दिसंबर 2024 में सार्थक ने विजय हजारे ट्रॉफी में शानदार वापसी की.2017 विजय हजारे ट्रॉफी के दौरान उन्होंने गौतम गंभीर के साथ ओपनिंग की थी. ऋषभ पंत इस मैच में कप्तानी कर रहे थे. सार्थक ने 37 रनों की पारी खेली थी. यह उनका विजय हजारे में डेब्यू मैच था.सार्थक इससे पहले तब चर्चा में आए थे जब उन्होंने अपने पिता पप्पू यादव संग 24 मार्च 2024 को कांग्रेस पार्टी ज्वाइन की थी. तब पप्पू यादव अपने बेटे संग कांग्रेस हेड क्वार्टर में पहुंचे थे और जन अधिकार पार्टी को कांग्रेस में विलय कर लिया था.अब अपने परिवार की राजनीतिक विरासत को बढाने के लिए राजनीति में आ सकते हैं.
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सार्थक नियमित रूप से जिम और ट्रेनिंग सेशन में समय बिताते हैं. यही कारण है कि मैदान पर वह फुर्तीले और ऊर्जा से भरपूर नजर आते हैं.क्रिकेट के अलावा सार्थक की पर्सनालिटी भी लोगों को खूब पसंद आती है. अक्सर वो अपनी स्टाइलिश तस्वीरें इंस्टाग्राम पर अपलोड करते रहते हैं. लुक के हिसाब से चिराग पासवान को भी टक्कर देते हैं.अब ये देखना दिलचस्प होगा कि क्रिकेट के मैदान में धमाल मचानेवाले सार्थक राजनीति के मैदान में कितना कमाल दिखा पाते हैं?