सिटी पोस्ट लाइव
पूर्णिया के सांसद राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव के लिए आज राहत भरी खबर आई। पटना सिविल कोर्ट के एसीजेएम-1 (अपर मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी) की अदालत ने उन्हें तीन दशक पुराने एक मामले में जमानत दे दी है। पिछले कुछ दिनों से पटना की बेऊर जेल में बंद सांसद अब जल्द ही बाहर आएंगे।
कड़े पहरे में हुई सुनवाई
मंगलवार को पटना सिविल कोर्ट में सुरक्षा के अभूतपूर्व इंतजाम देखे गए। दरअसल, बीते दिन कोर्ट परिसर को बम से उड़ाने की धमकी मिलने के बाद पुलिस प्रशासन पूरी तरह सतर्क था। चप्पे-चप्पे पर सुरक्षा बलों की तैनाती की गई थी और हर आने-जाने वाले की गहन तलाशी ली जा रही थी। कल इसी धमकी के कारण सुनवाई टल गई थी, जिससे सांसद की रिहाई का इंतजार एक दिन और बढ़ गया था।
क्या था 31 साल पुराना मामला?
सांसद पप्पू यादव की यह गिरफ्तारी 6 फरवरी 2026 को उनके पटना स्थित मंदिरी आवास से की गई थी, जो कि वर्ष 1995 में पटना के गर्दनीबाग थाने में विनोद बिहारी लाल द्वारा दर्ज कराए गए 31 साल पुराने एक मामले से संबंधित है। इस मामले में उन पर आरोप था कि उन्होंने और उनके सहयोगियों ने निजी निवास के उद्देश्य से एक मकान किराए पर लिया था, परंतु बाद में धोखाधड़ी करते हुए उसका उपयोग राजनीतिक कार्यालय के रूप में करने लगे। इसी विवाद के कारण उन पर जालसाजी और दस्तावेजों की हेराफेरी से जुड़ी धारा 467 जैसी गंभीर धाराएं लगाई गई थीं, और लंबे समय तक अदालत में पेश न होने के कारण उनके खिलाफ कुर्की-जब्ती समेत गिरफ्तारी का वारंट जारी किया गया था।
गिरफ्तारी पर गरमाई सियासत
सांसद की गिरफ्तारी के बाद बिहार से लेकर दिल्ली तक सियासी हलचल तेज हो गई थी। कांग्रेस नेता राहुल गांधी और प्रियंका गांधी ने इस कार्रवाई को ‘राजनीतिक प्रतिशोध’ करार दिया। समर्थकों का तर्क है कि पप्पू यादव हाल ही में पटना में एक NEET छात्रा की संदिग्ध मौत के मामले में सरकार को घेर रहे थे, जिसके कारण जानबूझकर इस पुराने मामले को पुनर्जीवित किया गया।
अब जमानत मिलने के बाद समर्थकों में खुशी की लहर है, हालांकि कोर्ट ने उन्हें भविष्य में कानूनी प्रक्रियाओं में सहयोग करने का निर्देश दिया है।