नालंदा मंदिर भगदड़: 8 महिलाओं की मौत से कोहराम, NHRC पहुँचा मामला…

Ritu Raj

नालंदा जिले के मघड़ा स्थित शीतला माता मंदिर में 31 मार्च 2026 (मंगलवार) को एक बेहद दर्दनाक हादसा हुआ, जिसने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया। चैत्र माह के अंतिम मंगलवार और शीतला अष्टमी के अवसर पर मंदिर में बड़ी संख्या में श्रद्धालु पूजा-अर्चना के लिए पहुंचे थे। इस मौके पर वहां मेला भी लगा हुआ था, जिससे भीड़ और अधिक बढ़ गई।

सुबह के समय दर्शन करने की होड़ में अचानक स्थिति बेकाबू हो गई। भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पर्याप्त सुरक्षा और प्रबंधन की व्यवस्था नहीं होने के कारण धक्का-मुक्की शुरू हो गई। देखते ही देखते यह अफरातफरी भगदड़ में बदल गई। इस हादसे में 8 महिलाओं की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई, जबकि कई अन्य श्रद्धालु घायल भी बताए जा रहे हैं। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, प्रशासन को पहले से ही भीड़ का अंदेशा था, लेकिन इसके बावजूद पर्याप्त पुलिस बल, बैरिकेडिंग या भीड़ नियंत्रण के ठोस इंतजाम नहीं किए गए थे। इसी लापरवाही के चलते यह बड़ा हादसा हुआ। इस घटना के बाद स्थानीय प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। मामले को लेकर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) में भी शिकायत दर्ज कराई गई है। यह शिकायत नालंदा जिले के सारे थाना क्षेत्र के बहादी विगहा निवासी और सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता ब्रजेश सिंह द्वारा की गई है। आयोग ने इस शिकायत को डायरी संख्या 7089/IN/2026 के तहत दर्ज कर लिया है।

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शिकायत में इस घटना को प्रशासन की ‘जानबूझकर की गई विफलता’ बताया गया है। आरोप है कि संभावित भीड़ के बावजूद सुरक्षा के पर्याप्त उपाय नहीं किए गए, जिससे लोगों की जान चली गई। शिकायतकर्ता ने आयोग से मांग की है कि बिहार के मुख्य सचिव और नालंदा के जिलाधिकारी से इस पूरे मामले की विस्तृत रिपोर्ट (ATR) मांगी जाए। इसके साथ ही दोषी अधिकारियों की जवाबदेही तय करने के लिए उच्च स्तरीय जांच समिति गठित करने और मृतकों के परिजनों को उचित मुआवजा एवं न्याय दिलाने की भी मांग की गई है। यह हादसा एक बार फिर यह सवाल खड़ा करता है कि बड़े धार्मिक आयोजनों में भीड़ प्रबंधन और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर प्रशासन कितनी गंभीरता बरतता है।

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