बिहार की राजनीति में सोमवार को उस वक्त नया मोड़ आया, जब हिन्दुस्तानी आवाम मोर्चा (से.) के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. संतोष कुमार सुमन ने पार्टी के सभी विधायकों को तत्काल पटना बुला लिया। पार्टी के निर्देश के मुताबिक, सभी विधायकों को 14 और 15 अप्रैल 2026 को हर हाल में मुख्यालय में मौजूद रहना होगा। इस कदम के बाद राज्य की राजनीति में हलचल और तेज हो गई है।

पार्टी के राष्ट्रीय प्रधान महासचिव राजेश कुमार पाण्डेय द्वारा जारी पत्र में इसे संगठनात्मक अनुशासन से जुड़ा अहम फैसला बताया गया है। वहीं, मुख्य प्रवक्ता श्याम सुन्दर शरण ने कहा कि आने वाले दिनों में महत्वपूर्ण निर्णय लिए जाने हैं, इसलिए सभी विधायकों का पटना में रहना जरूरी है ताकि उन्हें तुरंत दिशा-निर्देश दिए जा सकें। इधर, प्रशासनिक स्तर पर भी गतिविधियां तेज हो गई हैं। राज्यपाल के सचिव गोपाल मीणा ने पटना में अधिकारियों के साथ बैठक बुलाकर समारोह की तैयारियों की समीक्षा की है। बिहार लोक भवन में संभावित कार्यक्रम को लेकर सुरक्षा और व्यवस्थाओं पर चर्चा की जा रही है।

दूसरी ओर, भाजपा नेता सम्राट चौधरी के आवास पर भी लगातार बैठकों का दौर जारी है, जिससे संकेत मिल रहे हैं कि नई सरकार के गठन की रूपरेखा लगभग तैयार हो चुकी है। मौजूदा सियासी समीकरणों में ‘हम’ पार्टी की भूमिका निर्णायक मानी जा रही है। जानकारों का मानना है कि पार्टी नेतृत्व जल्द ही कोई बड़ा फैसला ले सकता है, जिसके लिए विधायकों की एकजुटता बेहद जरूरी है। प्रशासनिक तैयारियों और विधायकों को पटना में रुकने के निर्देशों को देखते हुए कयास लगाए जा रहे हैं कि नई सरकार का शपथ ग्रहण 14 या 15 अप्रैल को हो सकता है। ऐसे में आने वाले कुछ घंटे बिहार की राजनीति के लिए बेहद अहम साबित हो सकते हैं।