नीतीश सरकार के मंत्री की गाड़ी का नोंचाझंडा, कहा- मंत्रीजी, दोबारा मत दिखना!

Deepak Sharma

सिटी पोस्ट लाइव
बिहार के भभुआ में कल नीतीश सरकार में मंत्री जमा खान को अल्पसंख्यक समुदाय के उन प्रदर्शनकारियों ने घेर लिया जो वक्फ़ संशोधन बिल के खिलाफ़ प्रदर्शन कर रहे थे। इन लोगों ने मंत्री की गाड़ी का झंडा नोंचकर फेंक दिया और मंत्री को खुलेआम इलाके में दोबारा न आने की धमकी दी। भभुआ में केंद्र सरकार की ओर से लाए गए वक्फ संशोधन बिल 2025 के खिलाफ रैली निकाली गयी. इस विरोध-प्रदर्शन के दौरान प्रदर्शनकारी जब भभुआ के मुख्य सड़क से होकर गुजर रहे थे, तब ही उसी वक्त बिहार सरकार के अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री जमा खान का काफिला उस जाम में फंस गया. मंत्री जमा खान की गाड़ी को देख प्रदर्शन कर रहे लोग और आक्रोशित हो गये और उनके खिलाफ नारेबाजी करने लगे. लोगों को आक्रोशित होते देख उनके सुरक्षा बल गाड़ी को सुरक्षित निकालने की कोशिश करने लगे. इसी दौरान उनके काफिले में शामिल एक गाड़ी पर लगे जनता दल यूनाइटेड के झंडे को प्रदर्शनकारियों ने नोच कर फेंक दिया. इस दौरान जमा खान के खिलाफ जमकर नारेबाजी की गयी. वफ्फ बोर्ड बिल के संशोधन के विरोध में चल रहे विरोध मार्च के बीच में ही शहर के समाहरणालय पथ पर पुराने मुंडेश्वरी सिनेमा हाल के पास बिहार के अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री जमा खां भी अपने वाहनों के काफिले के साथ विरोध मार्च के जाम में फंस गये. इधर, मंत्री की गाड़ी देखते ही प्रदशनकारियों और ज़्यादा आक्रोशित हो गए और जमा खान के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी. मंत्री जमा खान और उनकी पार्टी के खिलाफ खूबन नारे लगाये गए. इस दौरान वहां हालात तनावपूर्ण बन गए। मंत्री के पीछे के वाहनों में लगे जदयू के झंडे भी प्रदशनकारियों ने नोच कर फेंक दिए. मंत्री जमा खान के बाॅडीगार्ड्स ने बड़ी मशक्कत से किसी तरह मंत्री के गाड़ी और उनके काफिले को जाम से बाहर निकलवाया. हालांकि, इसके बावजूद लोग मंत्री के खिलाफ नारेबाजी करते रहे. इस घटना के बाद, यह सवाल उठ रहा है कि क्या नीतीश सरकार के मंत्री, विधायक जब भी अल्पसंख्यक बहुल इलाकों में जाएंगे या उन इलाकों से गुजरेंगे, तो उन्हें विरोध का सामना करना पड़ेगा। अगर ऐसा होगा, तो तनाव के हालात भी बन सकते हैं। ऐसे में पुलिस के लिए इससे निपटना मुश्किल हो सकता है और विधायक-सांसद और दूसरे जनप्रतिनिधियों के लिए क्षेत्र में घूमने में मुश्किल आ सकती है।
बिहार के मोतीहारी जिले के अरेराज प्रखंड स्थित उच्च माध्यमिक विद्यालय सरेया महाराजगंज का एक वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है, जिसमें छात्रों को किताबों के बजाय झाड़ू थामे स्कूल की सफाई करते देखा जा रहा है।

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शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव (ACS) द्वारा स्कूलों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करने के निर्देशों के बावजूद, इस वायरल वीडियो ने सरकारी प्रयासों की ज़मीनी हकीकत को उजागर कर दिया है। वीडियो में देखा गया कि शिक्षक बच्चों को पढ़ाने के बजाय उनसे सफाई का काम करवा रहे हैं। सोशल मीडिया पर लोग तीखी प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं और इसे “शिक्षा का मज़ाक” करार दे रहे हैं।

वायरल वीडियो पर बवाल, ACS के आदेशों की उड़ रही धज्जियां : इस वायरल वीडियो को लेकर सोशल मीडिया पर तरह-तरह की टिप्पणियाँ की जा रही हैं। यूज़र्स का कहना है कि शिक्षा विभाग के आला अधिकारियों के आदेशों को स्वयं उनके अधीनस्थ शिक्षक ही पलीता लगा रहे हैं। कई यूज़र्स ने इसे “विद्यालय में गजब का खेल” बताया है और वीडियो को शिक्षा तंत्र की विफलता का प्रतीक कहा है।

शिक्षकों की संख्या अधिक, छात्रों की पढ़ाई अधूरी? : सोशल मीडिया पर यह भी आरोप लगाया जा रहा है कि विद्यालय में छात्रों की अपेक्षा शिक्षकों की संख्या अधिक है, फिर भी शिक्षा की गुणवत्ता अत्यंत खराब है। साथ ही, स्कूल में नामांकन के समय तयशुदा फीस से अधिक राशि लेकर रसीद न देने जैसे गंभीर आरोप भी लगाए गए हैं।

जांच की मांग तेज, कार्रवाई की उम्मीद : लोगों ने सोशल मीडिया के माध्यम से शिक्षा विभाग और प्रशासन से मांग की है कि इस मामले की गहराई से जांच कर दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाए। कई यूज़र्स ने वरीय अधिकारियों पर मिलीभगत का आरोप लगाते हुए पूरे विद्यालय की जांच कराने की मांग की है।

मुख्याध्यापक ने आरोपों को किया खारिज : विद्यालय के प्रधानाध्यापक बीरेंद्र मिश्र ने छात्रों से सफाई करवाने और फीस को लेकर किसी तरह की अनियमितता के आरोपों से इनकार किया है। उन्होंने कहा कि कभी-कभी भीड़ अधिक होने की स्थिति में दो-तीन दिनों बाद छात्रों को फीस की रसीद दी

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