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नीतीश कुमार के कोर वोटर्स कौन हैं? आप कहेंगे कि कुर्मी, लेकिन जी नहीं, नीतीश कुमार कुर्मी जाति जिनकी बिहार में जनसंख्या तीन प्रतिशत से भी कम है की बदौलत 20 साल से बिहार के सीएम हैं क्या? नीतीश कुमार की असली कोर वोटर्स हैं महिलाएं। 1 जनवरी 2025 को आधार मानकर चुनाव आयोग की ओर से जारी की गई मतदाता सूची में महिला मतदाताओं की संख्या 3 करोड़ 72 लाख के करीब है. इन तीन करोड़ 72 लाख महिला मतदाताओं का बहुत बड़ा हिस्सा नीतीश कुमार का कोर वोटर्स है और ये महिलाएं बढ़-चढ़कर नीतीश कुमार के लिए वोट करती हैं। हो सकता है इन महिलाओं में से कई के पति दूसरी पार्टियों के कार्यकर्ता हो, लेकिन ये महिलाएं वोट नीतीश को दे आती हैं। अपने इन ही कोर वोटर्स को खुश करने के लिए नीतीश कुमार सरकार ने जुलाई से हर महिला के खाते में 2500 रुपए भेजने का मन बना लिया है। तैयारी लगभग पूरी हो गई है। दरअसल, मई में ही इस योजना का एलान किया जाना था और 2500 रुपए महीना भेजना शुरू कर दिया जाना था, लेकिन भारत-पाकिस्तान तनाव की वजह से यह हो नहीं पाया। अब हमारे सूत्रों ने बताया है कि नीतीश सरकार जुलाई से अपने कोर वोटर्स यानी कि बिहार की महिलाओं को 2500 रुपए महीना भेजना शुरू कर देगी। यह इसलिए भी ज़रूरी हो गया है क्योंकि नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने नीतीश कुमार के कोर वोटर्स यानी कि महिलाओं को तोड़ने के लिए पहले ही एलान कर दिया है कि बिहार में अगर महागठबंधन की सरकार बनती है, तो हर महिला को झारखंड की तर्ज पर 2500 रुपए महीना दिया जाएगा। हमारे पास पक्की खबर है कि नीतीश सरकार तेजस्वी यादव की इस कोशिश को शुरू में ही खत्म कर देना चाहती है और इसीलिए जुलाई से हर महिला के खाते में 2500 रुपए भेजे जाने लगेंगे। मतलब कि अगर किसी परिवार में चार महिलाएं हैं, तो हर महीने दस हज़ार रुपए सरकार की तरफ़ से आ जाएंगे। आप सोचिए, महंगाई की मार सबसे ज़्यादा महिलाओं पर ही पड़ती है, क्योंकि घर तो वही चलाती हैं, अब अगर हर महीने उनके बैंक खाते में पांच-दस हज़ार रुपए सरकार की तरफ़ से आने लगेंगे, तो क्या नीतीश कुमार के कोर वोटर्स आधी आबादी को कोई तोड़ पाएगा? बहुत मुश्किल है, है न? पिछले कुछ चुनावों का वोटिंग पैटर्न देखें तो महिला मतदाता वोट डालने के लिए पुरुषों के मुकाबले अधिक संख्या में घर से निकली हैं. महिलाओं वोटर्स का टर्नआउट पुरुषों के मुकाबले ज़्यादा रहा है. बिहार विधानसभा के पिछले तीन चुनावों से महिला मतदाताओं का टर्नआउट पुरुषों के मुकाबले ज़्यादा रहा है. 2010 के चुनाव में पुरुषों का टर्नआउट 53 और महिलाओं का 54.5 फीसदी रहा था. 2015 में 51.1 फीसदी पुरुषों के मुकाबले 60.4 फीसदी महिलाओं ने मतदान किया था. 2020 के बिहार चुनाव में जहां 54.6 फीसदी पुरुषों ने वोट किए थे. इस चुनाव में भी 59.7 फीसदी महिलाओं ने वोट किया था, जो पुरुषों के मुकाबले 5 फीसदी अधिक है. जनता दल यूनाइटेड लगातार 16 फीसदी के आसपास वोट शेयर बरकरार रखने में सफल रही है, तो इसके पीछे इस महिला वोटबैंक की भूमिका बेहद अहम मानी जाती है।
जुलाई से अपने हर कोर वोटर को 2500 रुपए देगी नीतीश सरकार!