हर गठबंधन में दो-तीन दावेदार, RJD से JDU में गए MLA के सामने बड़ी चुनौती

Deepak Sharma

सिटी पोस्ट लाइव
नीतीश सरकार के विश्बावासमत के दौरान अपने बेटे RJD विधायक चेतन आनंद के जरिये बड़ा खेला करनेवाले बाहुबली नेता आनंद मोहन परेशान हैं।उनके बेटे आरजेडी से जेडीयू में तो आ गये हैं लेकिन जेडीयू से सीट मिलना इतना आसान नहीं। शिवहर विधानसभा सीट पर चुनाव से पहले एनडीए और महागठबंधन दोनों गठबंधनों में कई दावेदार हैं।आरजेडी विधायक चेतन आनंद के जेडीयू में शामिल होने के बाद भी जेडीयू के स्थानीय नेता उन्हें स्वीकार करने को तैयार नहीं हैं।टिकेट के कई दावेदार सामने हैं।

आरजेडी विधायक चेतन आनंद ने तो नीतीश सरकार का साथ संकट में दिया क्या नीतीश कुमार उन्हें एक टिकेट भी नहीं दे पायेगें?

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गठबंधनों के बीच सीटों का बंटवारा अभीतक हुआ नहीं है।शिवहर विधानसभा सीट से एनडीए और आईएनडीआई दोनों गठबंधन में कई दावेदार हैं। वे क्षेत्र में लगातार सक्रिय भी हैं। गठबंधन व दलों के बीच इसे लेकर स्थानीय स्तर पर खींचतान भी चल रही है। दोनों ओर से दो से तीन दावेदार हैं। पिछले चुनाव में चेतन आनंद ने जेडीयू के मो। शरफुद्दीन को हराया था लेकिन इस बार मुकाबला और भी दिलचस्प होने की संभावना है।आरजेडी विधायक चेतन आनंद भले ही जदयू में पहुंच एनडीए का हिस्सा हो गए हैं, लेकिन उन्हें जिले के नेता स्वीकार नहीं कर रहे।जेडीयू नेता सह पूर्व विधायक मो। शरफुद्दीन हों या बीजेपी के ठाकुर रत्नाकर राणा, दोनों में से कोई भी चेतन आनंद को एनडीए का हिस्सा नहीं मान रहा। दोनों उन्हें अब भी राजद का विधायक बता रहे हैं।

चेतन आनंद अब क्या करेगें?

विधायक चेतन आनंद एनडीए समर्थित जदयू नेता के रूप में जिले के सरकारी कार्यक्रमों में भाग ले रहे हैं। नीतीश कुमार के नाम के सहारे दोबारा मैदान में कूदने को तैयार हैं। तीनों नेता चुनाव लड़ने के लिए तैयार हैं। जदयू की आधी टीम शरफुद्दीन के साथ है तो कुछ नेता चेतन आनंद के साथ। पिछली बार यह सीट जदयू के पास थी।दूसरी ओर, इस सीट पर बेलसंड से राजद विधायक संजय गुप्ता, शिवहर जिप अध्यक्ष विजय कुमार सिंह, बेलसंड से जदयू की पूर्व विधायक सुनीता सिंह चौहान, शिवहर से राजद के पूर्व विधायक पंडित रघुनाथ झा के पुत्र अजीत कुमार झा व विधान पार्षद फारूख शेख भी चुनावी मैदान में उतरने की तैयारी में हैं।

शिवहर सीट का सियासी इतिहास क्या है?

शिवहर सीट पर वर्ष 1972 से 1995 तक रघुनाथ झा लगातार जीतते रहे। लालू प्रसाद के साथ विवाद के बाद पंडित रघुनाथ झा ने वर्ष 1998 में इस्तीफा दे दिया। वर्ष 1998 में हुए उपचुनाव में राजद के टिकट पर ठाकुर रत्नाकर राणा ने समता पार्टी के पंडित रघुनाथ झा को हराया था। वर्ष 2000 में राजद के सत्यनारायण प्रसाद ने समता पार्टी के अजीत कुमार झा को 5,019 वोटों से हराया था।फरवरी 2005 व अक्टूबर 2005 में पंडित रघुनाथ झा के पुत्र राजद प्रत्याशी अजीत कुमार झा ने जदयू के ठाकुर रत्नाकर को करीबी मुकाबले में हराया था। वर्ष 2015 में गठबंधन धर्म के चलते टिकट न मिलने पर ठाकुर रत्नाकर राणा ने निर्दलीय चुनाव लड़ 22,500 से अधिक वोट हासिल किए। पिछले लोकसभा चुनाव में भी मैदान में उतरने को तैयार थे, लेकिन सीट जदयू के पास चली गई। इस बार वह मौका हाथ से नहीं जाने देना चाहते हैं।

सवाल-पिछले चुनाव में कैसा था चेतन आनंद का प्रदर्शन?

पिछले विधानसभा चुनाव में राजद के चेतन आनंद ने जदयू के मो। शरफुद्दीन को 21।7 प्रतिशत यानी 36 हजार 686 मतों से हराया था। शरफुद्दीन को 36 हजार 457 मत मिले थे। चेतन आनंद बाद में जदयू के पाले में आ गए हैं। इस बार वह फिर शिवहर से चुनाव लड़ने को तैयार हैं।वर्ष 2010 के चुनाव में एनडीए समर्थित जदयू के मो। शरफुद्दीन ने बसपा की प्रतिमा देवी को 1,631 मतों से हराया था। जबकि वर्ष 2015 में महागठबंधन समर्थित जदयू के टिकट पर शरफुद्दीन एनडीए समर्थित हम प्रत्याशी लवली आनंद से महज 461 वोटों से जीत दर्ज करने में कामयाब हुए थे। पिछला चुनाव वह हार गए। इस बार वह पहले से ही टिकट के लिए दावेदारी कर रहे हैं।

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