सिटी पोस्ट लाइव
बिहार विधानसभा चुनाव से ठीक पहले, बिहार सरकार द्वारा चलाई जा रही मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना पर भोजपुरी अभिनेता खेसारी लाल यादव ने ज़ोरदार तंज कसा है। उन्होंने कहा है कि लोगों को अकाउंट में एकमुश्त 10 हज़ार रुपये नहीं, बल्कि हर महीने 10 हज़ार रुपये की आय चाहिए, जिसके लिए सरकार को रोजगार उपलब्ध कराना चाहिए।
खेसारी ने माँगा पैसा नहीं, रोजगार
दरअसल, बिहार सरकार ने मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना के तहत राज्य की 21 लाख महिलाओं के खाते में हाल ही में 10-10 हजार रुपये ट्रांसफर किए हैं। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए 2100 करोड़ रुपये हस्तांतरित किए थे।
इस पर तंज कसते हुए खेसारी लाल यादव ने कहा: “हमें 10 हज़ार अकाउंट में नहीं… 10 हज़ार महीना चाहिए… सरकार रोजगार दे।” उन्होंने जोर देकर कहा, “हमें रोज़गार दे दो… सरकार से हमें पैसे नहीं, हमें रोज़गार चाहिए। आप रोज़गार दे दो हम सक्षम हैं कमा कर अपने परिवार का पेट पालने के लिए।”
खेसारी लाल ने इस बात पर दुख जताया कि बिहार में अच्छी व्यवस्थाओं की कमी है। उनके इस वीडियो को तेजस्वी यादव ने सोशल मीडिया पर पोस्ट किया है, जिससे यह तंज अब राजनीतिक रंग ले चुका है और NDA नीत सरकार को घेरने का विपक्षी दलों का हथियार बन गया है।
चुनावी योजनाओं पर सवाल
आमतौर पर देखा जाता है कि चुनाव से पहले सरकारें कई ऐसी योजनाएँ और स्कीम लाती हैं, जिसका लोगों को लाभ मिलता है। बिहार सरकार ने भी चुनाव से पहले योजनाओं की झड़ी लगा दी है, जिसमें सीएम नीतीश ने महिला से लेकर युवा और मजदूरों सहित कई वर्गों के लिए योजनाओं की घोषणा की। हालांकि, चुनाव से ठीक पहले जनता को खुश करने के लिए शुरू की गई इन योजनाओं के समय पर विपक्ष लगातार सवाल उठा रहा है।
महिला रोजगार योजना के तहत किश्तें
आपको बता दें कि मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना के तहत अब तक तीन किस्तों का पैसा ट्रांसफर किया जा चुका है:
• पहली किस्त: 26 सितंबर को जारी की गई थी, जब खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 75 लाख महिलाओं के खाते में पैसा भेजा था।
• दूसरी किस्त: 3 अक्टूबर को भेजी गई, इस दौरान सीएम नीतीश ने 25 लाख महिलाओं को 10-10 हजार रुपये की सौगात दी।
• तीसरी किस्त: 6 अक्टूबर को जारी हुई, जिसमें 21 लाख महिलाओं को पैसा मिला।
इस तरह, कुल 1.21 करोड़ महिलाओं को रोजगार शुरू करने के लिए पैसा मिल चुका है। खेसारी लाल यादव का यह तंज सीधे तौर पर इन डीबीटी योजनाओं के बदले स्थायी रोजगार और बेहतर व्यवस्था उपलब्ध कराने की मांग पर ज़ोर देता है।