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बिहार अब देश के उन चुनिंदा राज्यों की सूची में शामिल होने जा रहा है, जो परमाणु ऊर्जा के जरिए अपनी बिजली जरूरतों को पूरा करेंगे। राज्य सरकार ने ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने और ‘नेट जीरो’ लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए तीन जिलों—नवादा, बांका और सीवान—में न्यूक्लियर पावर प्लांट लगाने की कवायद तेज कर दी है। इस महात्वाकांक्षी योजना के तहत लगभग 20,000 करोड़ रुपये के निवेश से बिहार का पहला परमाणु ऊर्जा संयंत्र स्थापित किया जाएगा।
नवादा का रजौली बनेगा ऊर्जा का केंद्र
परियोजना के शुरुआती ब्लूप्रिंट के अनुसार, नवादा जिले का रजौली प्रदेश के पहले परमाणु ऊर्जा संयंत्र की मेजबानी करेगा। करीब 20,000 करोड़ रुपये की इस भारी-भरकम लागत वाली योजना पर काम शुरू करने की तैयारी है। इसके अलावा, बांका के शंभूगंज और भितिया क्षेत्र में प्रथम चरण का तकनीकी सर्वे पूरा कर लिया गया है, जहां की भौगोलिक स्थिति परमाणु संयंत्र के लिए उपयुक्त पाई गई है। वहीं, सीवान जिले में भी भूमि के आकलन और जल स्रोतों की उपलब्धता की गहन जांच जारी है।
पंप स्टोरेज और सोलर पार्क से मिलेगा बैकअप
ऊर्जा उत्पादन के इस ढांचे को मजबूती देने के लिए लखीसराय के कजरा में 1231 एकड़ जमीन पर सौर ऊर्जा प्लांट का विकास किया जा रहा है। साथ ही, ‘ग्रीनको’ और ‘सन पेट्रोकेमिकल्स’ जैसी कंपनियां 13,000 करोड़ रुपये के निवेश से पंप स्टोरेज परियोजनाएं विकसित कर रही हैं। ये परियोजनाएं बैटरी की तरह काम करेंगी, जो सरप्लस बिजली को स्टोर करेंगी और पीक ऑवर्स (मांग अधिक होने पर) के दौरान निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करेंगी।
ग्रीन एनर्जी और नेट जीरो की ओर कदम
भारत सरकार के 2070 तक नेट जीरो कार्बन उत्सर्जन के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए बिहार की यह पहल बेहद महत्वपूर्ण है। वर्तमान में राज्य की 75% बिजली कोयले पर आधारित है, जिससे प्रदूषण का स्तर बढ़ता है। स्मॉल मॉड्यूलर रिएक्टर (SMR) जैसे विकल्पों पर ध्यान केंद्रित कर बिहार न केवल स्वच्छ ऊर्जा अपनाएगा, बल्कि औद्योगिक निवेश और रोजगार के हजारों नए अवसर भी पैदा करेगा।