E20 फ्यूल के खिलाफ दुष्प्रचार के पीछे ‘तेल आयात लॉबी’, नितिन गडकरी का बड़ा बयान

Ritu Raj

सिटी पोस्ट लाइव
केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने शुक्रवार को एक बार फिर E20 ईंधन को लेकर चल रहे विरोध पर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि ईंधन में इथेनॉल मिश्रण के खिलाफ सोशल मीडिया पर जो दुष्प्रचार चल रहा है, उसके पीछे ‘तेल आयात लॉबी’ का हाथ है। Gadkari ने इस बात पर जोर दिया कि सरकार को अभी तक E20 ईंधन को लेकर एक भी आधिकारिक शिकायत नहीं मिली है।

नई दिल्ली में एक कार्यक्रम को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए संबोधित करते हुए Gadkari ने कहा, “हमें एक भी आधिकारिक शिकायत नहीं मिली है।” उन्होंने आगे कहा, “यह तेल आयात समर्थक लॉबी है जो E20 ईंधन के खिलाफ सोशल मीडिया पर दुष्प्रचार कर रही है।”

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Gadkari ने अपने व्यक्तिगत अनुभव का भी हवाला दिया। उन्होंने कहा, “मैं अपनी कार में 100% इथेनॉल का उपयोग कर रहा हूं, और मुझे कोई समस्या नहीं हुई है। ब्राजील 27% इथेनॉल का उपयोग कर रहा है और वहां भी कोई समस्या नहीं हुई है।” उन्होंने कहा कि देश के अधिकांश वाहन निर्माताओं ने अब ऐसे फ्लेक्स-फ्यूल इंजन बनाना शुरू कर दिया है जो पेट्रोल और इथेनॉल दोनों पर चल सकते हैं।

परीक्षण के बाद ही बढ़ेगा इथेनॉल का मिश्रण
मंत्री ने स्पष्ट किया कि इथेनॉल मिश्रण को 20% से आगे बढ़ाने का निर्णय सभी आवश्यक परीक्षणों के बाद ही लिया जाएगा। उन्होंने कहा, “हम पेट्रोल में इथेनॉल मिश्रण को 20% से आगे बढ़ाने से पहले सभी आवश्यक परीक्षण और मानकों का पालन करेंगे।” यह बयान उन अटकलों पर विराम लगाने के लिए था कि सरकार जल्द ही इथेनॉल मिश्रण को और बढ़ा सकती है।

Gadkari का यह बयान ऐसे समय में आया है जब भारत सरकार लगातार देश को ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में काम कर रही है। जीवाश्म ईंधन के आयात पर देश की भारी निर्भरता को कम करने के लिए इथेनॉल मिश्रण एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। सरकार का लक्ष्य है कि E20 ईंधन के उपयोग से न केवल विदेशी मुद्रा की बचत होगी, बल्कि प्रदूषण में भी कमी आएगी।

ACMA (Automotive Component Manufacturers Association of India) समिट में दिए गए Gadkari के इस बयान से सरकार का रुख साफ हो गया है कि वह E20 कार्यक्रम को लेकर पूरी तरह से प्रतिबद्ध है और किसी भी तरह के दुष्प्रचार से प्रभावित नहीं होगी। सरकार का मानना है कि यह पहल देश की अर्थव्यवस्था और पर्यावरण दोनों के लिए फायदेमंद है।

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