पटना जू (संजय गांधी जैविक उद्यान) में बर्ड फ्लू के खतरे को देखते हुए प्रशासन काफी सतर्क है। हालांकि भोपाल से आई जांच रिपोर्ट नेगेटिव रही है, फिर भी एहतियात के तौर पर चिड़ियाघर 7 मार्च तक बंद रहेगा।
सुरक्षा और स्वच्छता के कड़े नियम;
केमिकल छिड़काव: जानवरों और पक्षियों के बाड़ों के आसपास दिन में दो बार कीटाणुनाशक रसायनों का छिड़काव किया जा रहा है।
कर्मचारियों के लिए प्रोटोकॉल: संक्रमण रोकने के लिए ‘वन-मैन-वन-केज’ नियम लागू है। एक बाड़े का कर्मचारी दूसरे बाड़े में नहीं जा सकता।
सुरक्षा किट: सभी कर्मियों को मास्क और सैनिटाइजर अनिवार्य कर दिया गया है। पक्षियों के बाड़ों (ग्रीन नेट एरिया) में प्रवेश करने से पहले विशेष गाइडलाइंस का पालन करना जरूरी है।
खान-पान में बड़ा बदलाव;
संक्रमण के खतरे को देखते हुए पक्षियों और जानवरों की डाइट पूरी तरह बदल दी गई है:-
मांसाहारी भोजन: चिकन को पूरी तरह बंद कर दिया गया है। इसके विकल्प के रूप में मटन, गिनी पिग और चूहे दिए जा रहे हैं।
पक्षियों का आहार: मोरों को अंडे की जगह अब लहसुन और पालक दिया जा रहा है।
ऑस्ट्रिच और इमु: इन्हें बाहर से आने वाली किसी भी सामग्री के बजाय जू परिसर में ही उगाए गए ताजे खीरे खिलाए जा रहे हैं।
वर्तमान स्थिति और रिपोर्ट;
निगेटिव रिपोर्ट: पटना जू के पक्षियों के सैंपल भोपाल स्थित राष्ट्रीय पशु चिकित्सा महामारी विज्ञान और रोग सूचना विज्ञान संस्थान भेजे गए थे, जहाँ रिपोर्ट एवियन इन्फ्लूएंजा (H5N1) के लिए निगेटिव आई है।
खतरे की वजह: पटना के कौशल नगर, कंकड़बाग और हाईकोर्ट परिसर में कौवों और मुर्गियों की अचानक मौत के बाद H5N1 की पुष्टि हुई थी।
सख्त निगरानी: सेंट्रल जू अथॉरिटी के अनुसार, संक्रमित क्षेत्र के 1 किमी के दायरे में गतिविधियां रोकने का निर्देश है। सिविल सर्जन ने भी सभी अस्पतालों को अलर्ट पर रखा है क्योंकि H5N1 इंसानों के लिए भी घातक हो सकता है।
इंसानों में बर्ड फ्लू (H5N1) के मुख्य लक्षण;
तेज बुखार: अचानक बहुत तेज बुखार आना।
सांस लेने में तकलीफ: छाती में दर्द, सांस फूलना या सूखी खांसी।
मांसपेशियों में दर्द: पूरे शरीर और जोड़ों में तेज दर्द।
गले में खराश: निगलने में दिक्कत और गले में सूजन।
अन्य लक्षण: सिरदर्द, पेट दर्द, दस्त (Diarrhea) और आंखों में लालिमा (Conjunctivitis)।