संसद सत्र से पहले PM मोदी का विपक्ष को सख्त संदेश: ‘नारों पर नहीं, नीति पर जोर; यहां ड्रामा नहीं डिलीवरी होनी चाहिए’

Ritu Raj

सिटी पोस्ट लाइव
संसद के शीतकालीन सत्र के आगाज से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विपक्ष को बेहद कड़ा और सीधा संदेश दिया है। सोमवार को देश को संबोधित करते हुए, पीएम मोदी ने सदन की कार्यवाही को सुचारू रूप से चलाने में सहयोग करने की अपील की और स्पष्ट किया कि संसद ‘ड्रामा का मैदान’ नहीं, बल्कि ‘डिलीवरी’ और ‘नीति निर्माण’ का मंच होना चाहिए।

प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन के दौरान विपक्ष पर हल्के-फुल्के अंदाज में तंज भी कसा। उन्होंने कहा कि हाल ही में बिहार चुनाव में मिली हार की वजह से विपक्षी दल “अशांत” लग रहे हैं। उन्होंने मानसून सत्र की तरह शीतकालीन सत्र की बर्बादी न हो, यह सुनिश्चित करने के लिए विपक्ष से अपने मतभेद भुलाकर अच्छी नीति और कानून पास कराने में सहयोग करने का आग्रह किया।

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“यहां ड्रामा नहीं डिलीवरी होनी चाहिए”
पीएम मोदी ने स्पष्ट शब्दों में कहा: “मैं सभी से निवेदन करूंगा कि जो मुद्दे हैं, उन पर विचार करें। ड्रामा करने की बहुत सी जगह है, जिसे ड्रामा करना है वह कर सकता है। यहां ड्रामा नहीं डिलीवरी होनी चाहिए। जो नारे लगाना चाहता है, पूरा देश उनके साथ है, बिहार चुनाव की हार के समय भी आप कह चुके हैं। लेकिन यहां नारों पर नहीं, नीति पर जोर होना चाहिए।”

उन्होंने आगे कहा कि भले ही राजनीति में नकारात्मकता कुछ हद तक काम कर सकती है, लेकिन अंततः देश के निर्माण के लिए सकारात्मक सोच की आवश्यकता होती है। पीएम ने सभी दलों से नकारात्मकता को किनारे रखकर देश बनाने पर ध्यान केंद्रित करने की अपील की।

बिहार चुनाव की हार पर तीखा तंज
प्रधानमंत्री ने विपक्षी दलों से जरूरी और मजबूत मुद्दे उठाने की अपील करते हुए, उनकी ‘अशांत’ मनोदशा पर तंज कसा। उन्होंने कहा कि उन्हें लगा था कि बिहार चुनाव को काफी समय हो गया है, इसलिए विपक्ष अपनी हार से उबर गया होगा, लेकिन सदन में आने से पहले उनकी कल की प्रतिक्रिया देखकर लगा कि हार का उन पर साफ असर हुआ है।

पीएम मोदी ने विपक्ष से कहा: “विपक्ष को भी संसद में मजबूत और जरूरी मुद्दे उठाने चाहिए। उन्हें (चुनाव में हार से) परेशान होकर बाहर आना चाहिए और हिस्सा लेना चाहिए।” उन्होंने सभी पार्टियों से यह भी स्पष्ट किया कि यह शीतकालीन सत्र हार से पैदा हुई ‘फ्रस्ट्रेशन’ का मैदान नहीं बनना चाहिए और न ही यह जीत से पैदा हुए ‘घमंड’ का मैदान होना चाहिए।

राष्ट्र निर्माण पर फोकस की अपील
प्रधानमंत्री ने जोर देकर कहा कि इस सत्र में ऐसे मुद्दों पर फोकस होना चाहिए, जैसे संसद देश के लिए क्या सोच रही है, क्या करना चाहती है और क्या करने जा रही है। उन्होंने विपक्ष से भी अपनी जिम्मेदारी निभाने और चर्चा में मजबूत एवं रचनात्मक मुद्दे उठाने का आग्रह किया। यह संदेश साफ है कि सरकार बिना किसी बड़े व्यवधान के अपने विधायी एजेंडे को आगे बढ़ाना चाहती है।

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