उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों की आहट के बीच सियासत अब ‘आस्था और मर्यादा’ के इर्द-गिर्द सिमटने लगी है। इस सियासी दंगल में बिहार के पूर्व मंत्री और राजद (RJD) नेता तेज प्रताप यादव ने एक बड़ा बयान देकर नई बहस छेड़ दी है। उन्होंने यूपी के प्रमुख तीर्थ स्थलों पर मांस और मदिरा की बिक्री को लेकर अपनी सख्त राय रखी है।
यूपी चुनाव से पहले नॉनवेज और शराब के मुद्दे पर गरमाई राजनीति में अब तेज प्रताप यादव की एंट्री हो गई है। कृष्ण भक्त के रूप में पहचाने जाने वाले तेज प्रताप ने धार्मिक स्थलों की पवित्रता को लेकर ‘समान नियम’ की वकालत की है।
“अयोध्या में रोक सही, तो वृंदावन में छूट क्यों?”
तेज प्रताप यादव ने अयोध्या में 15 किलोमीटर के दायरे में मांस की बिक्री पर लगे प्रतिबंध को एक सराहनीय कदम बताया, लेकिन साथ ही सरकार की मंशा पर सवाल भी उठाए। उन्होंने कहा कि अगर अयोध्या में पाबंदी लग सकती है, तो कान्हा की नगरी वृंदावन को इस दायरे से बाहर क्यों रखा गया है? वहीं,वृंदावन में खुलेआम शराब और मांस की बिक्री करोड़ों श्रद्धालुओं की भावनाओं को आहत करती है। उन्होंने मांग की कि केवल अयोध्या ही नहीं, बल्कि काशी, मथुरा और वृंदावन जैसे सभी पवित्र तीर्थ स्थलों पर मांस-मदिरा की बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध लगना चाहिए। हालांकि, तेज प्रताप ने साफ लहजे में कहा कि धार्मिक स्थलों की मर्यादा चुनावी नफे-नुकसान के आधार पर तय नहीं होनी चाहिए। उनके अनुसार, अगर नियम अलग-अलग हैं, तो यह ‘दोहरे मापदंड’ की राजनीति है। आस्था का सम्मान हर जगह एक समान होना चाहिए।
राम मंदिर और विपक्ष: “श्रद्धा निजी विषय है”
विपक्ष के राम मंदिर न जाने के सवाल पर तेज प्रताप ने बेहद सधे हुए अंदाज में जवाब दिया। उन्होंने कहा कि मंदिर जाना या न जाना पूरी तरह से व्यक्तिगत आस्था का विषय है। भक्ति दिल से होती है, इसमें किसी भी तरह की राजनीति या दबाव की गुंजाइश नहीं होनी चाहिए।