प्रदूषण, धूल या एलर्जी? अस्थमा के बढ़ते खतरे की असली वजहें…

Ritu Raj

सिटी पोस्ट लाइव

अस्थमा सिर्फ सांस की बीमारी नहीं, बल्कि यह जीवन की रफ्तार को थाम देने वाली चुनौती है। आज लाखों लोग खांसी, सांस फूलना और सीने में जकड़न जैसी परेशानियों को मामूली समझकर नज़रअंदाज़ कर देते हैं, जबकि यही अस्थमा के शुरुआती संकेत हो सकते हैं। आइए जानते है।

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अस्थमा के लक्षण कैसे पहचानें और क्या है इसके शुरूआती लक्षण।
देश में लगभग साढ़े 3 करोड़ लोग अस्थमा से प्रभावित है। इसमें बच्चे से लेकर बड़े तक शामिल है। अस्थमा फेफड़ों की एक क्रॉनिक बीमारी है। इसमें फेफड़ों की एयरवेज यानी सांस की नलियों में सूजन आ जाती है। कुछ ट्रिगर्स की वजह से नलियां सिकुड़ जाती है। उनके अंदर बलगम भर जाता है और सांस लेना मुश्किल हो जाता है। इससे व्यक्तियों को सांस फूलना, लगातार खांसी या सीटी जैसी आवाज आने जैसी परेशानियां होती है। शुरूआती लक्षण अक्सर हल्के होते है, लेकिन समय रहते पहचान और इलाजा दोनों जरूरी है।

ये लक्षण हो सकते है अस्थमा के संकेत:
– सीने में जकड़न
– सांस फूलना
– घबराहट
– बात करने में कठिनाई
– पैनिक होना
– भारी सांस लेना
– सोने में परेशानी

अस्थमा के मुख्य रिस्क फैक्टर्स:
– एलर्जी या एग्जीमा जैसी स्किन समस्या
– परिवार में अस्थमा
– ओबिसिटी
– धूम्रपान
– केमिकल्स, कीटनाशक दवाओं का एक्सपोजर

हालांकि, ऐसे व्यक्तियों को धूल, पालतू जानवरों की रूसी, ठंडी हवा, स्ट्रेस और धुआं से सावधान रहने की जरूरत है। इसके साथ ही सेकंडहैंड स्मोक या मौसम बदलने पर भी सतर्क रहें। बता दें, अस्थमा होने पर डॉक्टर की सलाह लेना बेहद जरूरी है। नियमित दवा और इनहेलर का इस्तेमाल करें। धूल, धुआं, परागकण और एलर्जेंस से बचें। घर में साफ-सफाई रखें और हल्का व्यायाम या प्राणायाम करें। अचानक अटैक की स्थिति में आपातकालीन योजना तैयार रखें। सही देखभाल से अस्थमा को नियंत्रित किया जा सकता है।

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