सिटी पोस्ट लाइव
बिहार विधानसभा चुनाव के पहले चरण में हुई ऐतिहासिक बंपर वोटिंग (रिकॉर्ड 64.69% मतदान) पर राजनीतिक रणनीतिकार से नेता बने प्रशांत किशोर ने खुशी जाहिर की है और इसे बदलाव की लहर का संकेत बताया है। जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर (पीके) ने दावा किया है कि इस बार ’14 नवंबर को इतिहास लिखा जाएगा’ क्योंकि जनता को ‘जन सुराज’ के रूप में एक नया और मजबूत विकल्प मिला है, जिससे वे उत्साहित होकर रिकॉर्ड संख्या में वोट डालने के लिए निकले हैं।
बढ़े मतदान का रुख ‘जन सुराज’ की तरफ
गयाजी में मीडिया से बातचीत के दौरान प्रशांत किशोर ने बढ़े हुए मतदान प्रतिशत का श्रेय अपनी पार्टी जन सुराज को दिया। उन्होंने कहा कि उनकी सबसे बड़ी सफलता यह है कि अब बिहार की जनता के पास एक ठोस विकल्प है। पीके ने कहा, “भाजपा के डर से नीतीश-भाजपा को वोट देने की मजबूरी खत्म हो गई है।” लोगों में उत्साह है, क्योंकि उन्हें एक नया विकल्प, एक नया रास्ता दिख रहा है, और इसीलिए इतनी बड़ी संख्या में मतदान हुआ है।
उन्होंने जोर देकर कहा कि इस बार मतदान प्रतिशत आजादी के बाद से अब तक का सबसे ज्यादा है। प्रशांत किशोर ने अपने पुराने दावे को दोहराते हुए कहा कि वह महीनों से कह रहे हैं कि बिहार में 60 प्रतिशत से ज़्यादा जनता बदलाव चाहती है। उनके अनुसार, जन सुराज की एंट्री ने लोगों को वह विकल्प दिया, जिससे वे खुश हैं और यह बढ़ा हुआ मतदान प्रतिशत इसी खुशी को दर्शाता है।
प्रवासी मजदूर बने ‘एक्स फैक्टर’
प्रशांत किशोर ने बंपर वोटिंग में प्रवासी मजदूरों की भूमिका को अहम बताया। उन्होंने दावा किया कि छठ पर्व के बाद भी यहां रुके प्रवासी मजदूरों ने इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, और वे ही इस चुनाव के ‘एक्स फैक्टर’ हैं। पीके को पूरा भरोसा है कि 14 नवंबर को परिणाम उनके पक्ष में होंगे।
डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी और तेजस्वी यादव पर निशाना
प्रशांत किशोर ने इस दौरान एनडीए और महागठबंधन दोनों के प्रमुख नेताओं पर निशाना साधा।
सम्राट चौधरी पर हमला: उन्होंने बिहार के डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी पर तंज कसते हुए कहा कि उन्हें पहले इस बात की चिंता करनी चाहिए कि वह अपनी तारापुर सीट से जीत रहे हैं या हार रहे हैं। पीके ने आरोप लगाया कि हार के डर से ही सम्राट चौधरी एनडीए के हर बड़े नेता (जैसे नीतीश कुमार, राजनाथ सिंह) को बुलाकर उनके लिए सभाएं और रैलियां करा रहे हैं। उन्होंने सवाल किया, “अगर जीत के लिए सुनिश्चित हैं तो बड़े-बड़े नेताओं की रैलियां क्यों करा रहे हैं? उनके पास जनता के बीच कोई मुद्दा नहीं है, जनता उन्हें क्यों चुनेगी?”
तेजस्वी यादव पर तंज: वहीं, राजद नेता तेजस्वी यादव पर टिप्पणी करते हुए प्रशांत किशोर ने कहा कि तेजस्वी खुद को छह महीने पहले से ही मुख्यमंत्री मान चुके हैं, लेकिन धरातल पर क्या चल रहा है, उन्हें मालूम नहीं है। उन्होंने याद दिलाया कि किसी भी पार्टी ने पहले यह नहीं कहा था कि इस चुनाव में भारी तादाद में वोटिंग होगी, जो उनके दावों की हकीकत को दर्शाता है।
प्रशांत किशोर के इन दावों ने बिहार चुनाव में एक नए राजनीतिक विमर्श को जन्म दे दिया है, जहां रिकॉर्ड मतदान को सत्ता विरोधी लहर और नए विकल्प के रूप में देखा जा रहा है।