सिटी पोस्ट लाइव
पटना : तेजस्वी यादव लगातार बिहार में लॉ एंड ऑर्डर के मुद्दे पर नीतीश सरकार को घेरने की कोशिश कर रहे थे। वे लगातार जदयू और बीजेपी के नेताओं पर अपराधियों को संरक्षण देने का आरोप लगा रहे थे। हर दिन अपराध के आंकड़ों को लेकर ट्वीट कर रहे थे और बचाव करने में सत्ताधारी दलों के नेताओंं के भी पसीने छूट रहे थे, लेकिन एक रीतलाल यादव ने राजद के युवराज तेजस्वी यादव का पूरा खेल खराब कर दिया। राजद की दिक्कत यह है कि रीतलाल यादव के मामले में पीड़ित पक्ष भी यादव है। दोनों कारोबारियों ने कहा भी कि हमने रीतलाल यादव से हाथ जोड़कर कहा भी कि हम आपकी ही जाति से हैं। आप को ही वोट देते हैं, तो रीतलाल यादव ने कहा कि हां, हां, तुम्हारे ही वोट से जीतते हैं हम, न? अब लोग यह सवाल पूछ रहे हैं कि जब विपक्ष में रहने पर राजद विधायक रीतलाल इस तरह कलेजा ठोककर स्टैंप पेपर पर लिखवाकर रंगदारी मांग रहे हैं, तो अगर राजद की सरकार बन गई तो क्या होगा? सबसे बड़ी बात यह है कि रीतलाल यादव जाति के आधार पर कोई भेदभाव भी नहीं कर रहे। उनकी जाति का हो या किसी दूसरी जाति का। सबके लिए टैक्स का रेट सेम है। आप सब को याद होगा कि गोपालगंज में जब यादवों की हत्या का आरोप वहां के जदयू विधायक पप्पू पांडे और उनके भाई और परिजनों पर लगा था, तब नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने पटना से गोपालगंज तक मार्च किया था, लेकिन इस बार भी पीड़ित तो यादव ही है पर तेजस्वी पुलिस पर सलेक्टिव होकर काम करने का आरोप लगा रहे हैं और रीतलाल यादव का ही बचाव कर रहे हैं। रीतलाल यादव के हालिया प्रकरण से तेजस्वी का अपराध को लेकर सरकार को घेरने की पूरी कवायद उल्टी पड़ रही है। अब सवाल यह उठता है कि रीतलाल यादव की वजह से अगर तेजस्वी यादव का इतना नुकसान हो रहा है, तो फिर तेजस्वी रीतलाल से पल्ला क्यों नहीं झाड़ लेते। इसका जवाब बड़ा गहरा है। कभी दानापुर से कोथवां जाने वाले रास्ते में साइकिल छीनने वाले रीतलाल यादव अब बड़े पावरफुल हो चुके हैं। हम आपको बताते हैं कैसे और कहां-कहां से रीतलाल को पावर मिलता चला गया।
रीतलाल यादव का नाम पहली बार लोगों की जुबान पर तब आया, जब 90 के दशक में वे दानापुर स्टेशन रोड पर राहगीरों से छीना-झपटी और मोटरसाइकिल चोरी के आरोपों से घिरने लगे. धीरे-धीरे, रीतलाल जमीन विवादों और जबरन वसूली में शामिल होने लगे. धीरे-धीरे हालत यह हो गई कि बिना रीतलाल यादव की अनुमति के कोई इस इलाके में घर नहीं बना सकता। फिर रीतलाल ने दूसरों की ज़मीन पर बिना पूछे बाउंड्री करना शुरू कर दिया। दानापुर में आरपीएस इंंजीनियरिंग कॉलेज के मालिक आरपी शर्मा के साथ हाथ मिलाकर रीतलाल को बहुत कुछ मिल गया। रीतलाल ने किसानों पर दबाव बनाकर आरपी शर्मा को ज़मीन दिलवाई, बदले में उन्हें अच्छी-खासी रकम मिली. फिर लालू यादव से नजदीकियां बढ़ीं, खासकर मीसा भारती को चुनाव जीताने के लिए लालू प्रसाद यादव जब रीतलाल यादव के घर गए, और उनके पिता से मदद मांगी, तो रीतलाल जेल में रहते हुए भी सुर्खियों में आ गए। 2016 में रीतलाल निर्दलीय एमएलसी बने, फिर 2020 में आरजेडी ने उन्हें टिकट दिया और वे विधायक बन गए। अब तो यहां तक कहा जाता है कि रीतलाल यादव तेजस्वी यादव के चुनाव अभियानों में फ़ाइनेंसर की भूमिका निभाते हैं। फ़ंडिंग करते हैं। रीतलाल को आगे बढ़ाने में सूरजभान सिंह और हुलास पांडे ने अहम भूमिका निभाई थी। दानापुर और समस्तीपुर रेल डिवीजन के ठेकों में रीतलाल की इतनी चलती है कि बिना रीतलाल से अनुमति लिए कोई ठेका नहीं ले सकता। इस चलती के पीछे सूरजभान और हुलास पांडे की ही शह रही है।
तेजस्वी का बड़ा नुकसान कर गए रीतलाल, बड़ी कीमत चुकाएगा राजद!