सिटी पोस्ट लाइव
बिहार विधानसभा चुनाव में राष्ट्रीय जनता दल (RJD) को मिली करारी हार के बाद अब पार्टी और नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव दोहरी मुश्किलों से घिर गए हैं। एक ओर जहां पार्टी इतिहास के सबसे खराब प्रदर्शनों में से एक से जूझ रही है, वहीं दूसरी ओर लालू परिवार के अंदरूनी कलह ने सार्वजनिक रूप ले लिया है, जिससे पार्टी की छवि धूमिल हो रही है और विरोधियों को हमला करने का नया मौका मिल गया है।
विधानसभा चुनाव में RJD का निराशाजनक प्रदर्शन
2020 के विधानसभा चुनाव में 75 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी RJD के लिए यह चुनाव किसी बुरे सपने से कम नहीं रहा। 141 सीटों पर चुनाव लड़ने के बावजूद पार्टी महज 25 सीटों पर ही सिमट गई। यह RJD के इतिहास में 2010 के 22 सीटों के बाद न्यूनतम प्रदर्शनों में से एक है।
RJD का स्ट्राइक रेट 17.73% रहा, जो सबसे निचले पायदान पर है। यह स्थिति इतनी निराशाजनक है कि स्ट्राइक रेट के मामले में पार्टी पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी के हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (HAM) से भी पिछड़ गई। सबसे बड़ी चिंता की बात यह है कि स्वयं तेजस्वी यादव भी अपनी सीट मुश्किल से बचा पाए और लड़खड़ाते हुए जीत हासिल की। इतनी बड़ी चुनावी हार का असर विधान परिषद और राज्यसभा में भी देखने को मिलेगा, जहां पार्टी के सदस्यों की संख्या कम होना तय है।
पारिवारिक विवाद ने पकड़ा तूल
चुनावी हार के सदमे से पार्टी उबर भी नहीं पाई थी कि लालू परिवार का आंतरिक विवाद सार्वजनिक हो गया, जिसने तेजस्वी की छवि को और नुकसान पहुंचाया।
तेज प्रताप यादव का अलग रास्ता: तेजस्वी के बड़े भाई तेज प्रताप यादव पहले ही परिवार और पार्टी से निष्कासित होने के बाद अपनी अलग पार्टी जनशक्ति जनता दल बना चुके हैं, हालांकि उन्हें इस चुनाव में हार का सामना करना पड़ा। लेकिन अब सुर्खियाँ उनके NDA विरोधी दल से बढ़ती नजदीकियों को लेकर बन रही हैं, जो RJD और परिवार में दरार को और गहरा करता है।
रोहिणी आचार्य का विरोधाभासी ट्वीट: हाल ही में, तेजस्वी यादव की बहन रोहिणी आचार्य ने सोशल मीडिया पर पार्टी नेतृत्व और विशेष रूप से कुछ सलाहकारों, जैसे संजय यादव और रमीज़ नेमत, की भूमिका पर सवाल उठाकर विवादों को हवा दे दी। उनके पार्टी और परिवार के विरुद्ध अनुचित और विरोधाभाषी स्वर ने इस आंतरिक विवाद को सार्वजनिक मुद्दा बना दिया है। उनके ये ट्वीट स्पष्ट रूप से नेतृत्व पर सवाल उठाते हैं और विरोधी दल इन सार्वजनिक विवादों का इस्तेमाल RJD और तेजस्वी के खिलाफ कर रहे हैं।
इन सभी घटनाओं से यह स्पष्ट हो रहा है कि न केवल पार्टी, बल्कि परिवार के अंदर भी सब कुछ ठीक नहीं है। राजनीतिक विश्वसनीयता में गिरावट के साथ-साथ पारिवारिक एकजुटता पर लगे सार्वजनिक आक्षेप ने तेजस्वी यादव के लिए मुश्किलें दोगुनी कर दी हैं। अब देखना यह है कि तेजस्वी इस दोहरी चुनौती का सामना कैसे करते हैं और क्या वे पार्टी तथा परिवार को फिर से एकजुट कर पाते हैं।