तेजस्वी की व्हीलचेयर वाली तस्वीर पर रोहिणी का बड़ा हमला, बोलीं— ‘चोट जब दिल पर लगती है, तो दर्द बेइंतहा होता है’

Ritu Raj

सिटी पोस्ट लाइव
बिहार विधानसभा के बजट सत्र के पहले दिन जहाँ तेजस्वी यादव का व्हीलचेयर पर सदन पहुँचना चर्चा का विषय बना, वहीं उनकी बड़ी बहन रोहिणी आचार्य के एक सोशल मीडिया पोस्ट ने बिहार की सियासत में ‘पारिवारिक युद्ध’ के नए संकेत दे दिए हैं। तेजस्वी के पैर की चोट पर सहानुभूति जताने के बजाय रोहिणी ने “दिल की चोट” का जिक्र कर राजद (RJD) के भीतर चल रही अंदरूनी खींचतान को सार्वजनिक कर दिया है।

सोशल मीडिया पर रोहिणी का भावनात्मक प्रहार
जैसे ही तेजस्वी यादव की व्हीलचेयर वाली तस्वीरें वायरल हुईं, रोहिणी आचार्य ने अपने ‘X’ हैंडल (पूर्व में ट्विटर) पर एक रहस्यमयी लेकिन तीखा पोस्ट साझा किया। उन्होंने लिखा, “जिस्मानी जख्म से भी दर्द होता है, मगर चोट जब दिल पर लगती है दर्द बेइंतहा होता है…” जानकार मान रहे हैं कि यह पोस्ट महज एक भावुक शायरी नहीं, बल्कि तेजस्वी यादव और उनके नेतृत्व के प्रति रोहिणी के बढ़ते असंतोष का सीधा प्रकटीकरण है।

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हार की टीस और ‘आयातित गुरु’ पर निशाना
रोहिणी आचार्य का यह गुस्सा हालिया बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में राजद की करारी हार के बाद से लगातार बढ़ रहा है। चुनाव में राजद महज 25 सीटों पर सिमट गई, जिसे रोहिणी ने पार्टी की बर्बादी करार दिया है। उन्होंने सीधे तौर पर तेजस्वी यादव को “कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष” बनाए जाने पर भी सवाल उठाए थे।

रोहिणी ने अपने पिछले बयानों में तेजस्वी के सलाहकारों पर निशाना साधते हुए कहा था कि जिसे जिम्मेदारी सौंपी गई, उसके ‘आयातित गुरु’ और गुर्गों ने लालू जी के दशकों के संघर्ष को मिटा दिया। उन्होंने तीखे सवाल पूछते हुए कहा, “पार्टी के सच्चे कार्यकर्ता पूछ रहे हैं कि जिन चंद घटिया लोगों को सर्वेसर्वा बना दिया गया, उन्होंने पार्टी के लिए क्या किया? समीक्षा रिपोर्ट सार्वजनिक क्यों नहीं की गई?”

परिवार में बढ़ती दूरियां
गौरतलब है कि 2025 के चुनाव परिणामों के बाद से रोहिणी ने परिवार और पार्टी के आधिकारिक कार्यक्रमों से दूरी बना ली है। तेजस्वी यादव के पैर के अंगूठे में लगी चोट को जहाँ राजद समर्थक उनकी राजनीतिक सक्रियता और प्रतिबद्धता से जोड़ रहे हैं, वहीं रोहिणी के पोस्ट ने यह साफ कर दिया है कि लालू परिवार के भीतर अब वैचारिक नहीं, बल्कि भावनात्मक मतभेद भी गहरे हो चुके हैं।

सत्र की शुरुआत में जहाँ नीतीश-तेजस्वी की बातचीत ने सुर्खियां बटोरीं, वहीं रोहिणी के इस वार ने राजद कार्यकर्ताओं को उलझन में डाल दिया है। क्या यह “दिल की चोट” बिहार की राजनीति में किसी नए समीकरण का संकेत है, यह आने वाला वक्त बताएगा।

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