अगर शपथ से पहले राज्यपाल दे दें इस्तीफा, तो कैसे बनेगी सरकार? जानें क्या है नियम…

Ritu Raj

बिहार चुनाव में एनडीए की प्रचंड जीत के बाद नई सरकार के गठन की प्रक्रिया तेज हो गई है। लेकिन इसी बीच एक दिलचस्प और महत्वपूर्ण संवैधानिक सवाल भी चर्चा में है कि अगर शपथ ग्रहण से पहले ही राज्यपाल इस्तीफा दे दें, तो सरकार बनाने की प्रक्रिया कैसे आगे बढ़ेगी? नीतीश कुमार की अंतिम कैबिनेट बैठक में विधानसभा भंग करने का प्रस्ताव भेजे जाने के साथ नई सरकार का रास्ता तो साफ हो गया, लेकिन राज्यपाल पद रिक्त होने की स्थिति में सत्ता हस्तांतरण की प्रक्रिया किसके हाथ में जाती है, यही अब सबसे बड़ा सवाल बन गया है।

भारतीय संविधान के अनुसार, राज्यपाल के इस्तीफे या कार्यभार संभालने में असमर्थ होने की स्थिति में शासन का कामकाज कभी नहीं रुकता। राज्यपाल का इस्तीफा राष्ट्रपति को भेजा जाता है और स्वीकार होते ही पद रिक्त माना जाता है। ऐसी स्थिति में राष्ट्रपति तुरंत किसी अन्य राज्य के राज्यपाल को उस राज्य का अतिरिक्त प्रभार दे देते हैं या यदि उप-राज्यपाल मौजूद हों तो उन्हें कार्यभार सौंपा जाता है। इसे additional charge कहा जाता है। दरअसल, नया कार्यवाहक या अतिरिक्त प्रभार वाला राज्यपाल अपने पद की शपथ लेने के तुरंत बाद सरकार गठन की प्रक्रिया को आगे बढ़ा सकता है, जिसमें नए मुख्यमंत्री को आमंत्रित करना और शपथ ग्रहण करवाना शामिल है। इस तरह राज्यपाल के इस्तीफे के बावजूद सत्ता हस्तांतरण की प्रक्रिया बाधित नहीं होती है।

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हालांकि, संविधान की दृष्टि से देखें तो राज्यपाल के इस्तीफे का सरकार गठन पर कोई सीधा असर नहीं पड़ता। नया या अतिरिक्त प्रभार संभालने वाला राज्यपाल आते ही पहला औपचारिक काम यही करता है कि बहुमत वाले नेता को शपथ दिलाई जाए और नई सरकार सुचारु रूप से स्थापित हो सके। भले कुछ घंटे का अंतर आ जाए, यह प्रक्रिया बाधित नहीं मानी जाती, क्योंकि शपथ केवल किसी वैध संवैधानिक प्राधिकारी के सामने ही होनी चाहिए। इसलिए राज्यपाल पद में बदलाव होने पर भी सत्ता का हस्तांतरण नहीं रुकता, और कार्यभार संभालते ही नया अधिकारी तुरंत मुख्यमंत्री और मंत्रिपरिषद के शपथ ग्रहण की प्रक्रिया आगे बढ़ा देता है।

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