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बिहार सरकार के उपमुख्यमंत्री और वित्त मंत्री सम्राट चौधरी ने हाल ही में नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की रिपोर्ट पर उठे विवाद को लेकर विपक्ष पर तीखा हमला बोला है। एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए सम्राट चौधरी ने दावा किया कि वित्त विभाग के प्रधान सचिव ने CAG को सभी उपयोगिता प्रमाण पत्र (Utilisation Certificates) सौंप दिए हैं, और विपक्ष इस मामले को बेवजह तूल दे रहा है।
सार्वजनिक हित में हुए सभी खर्च
चौधरी ने स्पष्ट रूप से कहा कि सरकार ने कोई भी खर्च अवैध तरीके से नहीं किया है। उन्होंने जोर देकर कहा, “जो भी खर्च हुआ है, वह जनता की भलाई के लिए हुआ है।” उन्होंने बताया कि खर्च का पूरा हिसाब भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक को दिया जा चुका है। उनके अनुसार, विपक्ष को इस मामले की पूरी जानकारी नहीं है और वह केवल राजनीतिक लाभ के लिए हंगामा कर रहा है।
सरकार पर लगे आरोपों को अधिकारियों पर मोड़ने का प्रयास
अपने बयान में सम्राट चौधरी ने एक महत्वपूर्ण टिप्पणी भी की, जिसने राजनीतिक गलियारों में चर्चा छेड़ दी है। उन्होंने कहा कि “यह ब्यौरा सरकार के पदाधिकारियों ने दिया है। सरकार किसी की भी हो, सरकार बदलती है, पदाधिकारी तो वही होते हैं। हम तो सिर्फ मॉनिटरिंग करते हैं।” चौधरी के इस बयान को कई लोग सरकार पर लगे आरोपों से पल्ला झाड़कर, जिम्मेदारी अधिकारियों पर डालने के प्रयास के तौर पर देख रहे हैं। इस बयान के जरिए उन्होंने एक तरह से यह संकेत दिया कि अगर कोई गड़बड़ी हुई भी है, तो उसकी जिम्मेदारी सीधे तौर पर अधिकारियों की है।
चौधरी के इस दावे के बाद, यह देखना दिलचस्प होगा कि विपक्ष इस पर कैसे प्रतिक्रिया देता है। फिलहाल, दोनों पक्ष अपने-अपने तर्कों के साथ जनता के बीच जा रहे हैं, और CAG रिपोर्ट का मुद्दा बिहार की राजनीति का एक अहम हिस्सा बन गया है।