AIIMS PATNA के ‘काइज़ेन 2025’ में शान की आवाज़ का जादू, ‘चाँद सिफ़ारिश’ पर झूमे डॉक्टर-छात्र

Ritu Raj

सिटीपोस्ट लाइव
अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS), पटना का वार्षिक सामाजिक-सांस्कृतिक उत्सव ‘काइज़ेन 2025’ इस वर्ष एक यादगार संगीतमय शाम का गवाह बना। देश के मशहूर बॉलीवुड पार्श्वगायक शान (Shaan) ने अपनी धमाकेदार लाइव परफॉर्मेंस से एम्स के छात्रों, फैकल्टी और डॉक्टरों को मंत्रमुग्ध कर दिया। लगभग चार घंटे तक चले इस ऊर्जावान कार्यक्रम में शान ने अपने एक से बढ़कर एक हिट गानों से पूरा वातावरण संगीत के रंग में रंग दिया।

शनिवार देर शाम आयोजित इस संगीत-संध्या में जैसे ही शान ने मंच संभाला, दर्शकों का उत्साह चरम पर पहुँच गया। उन्होंने अपनी सुरीली आवाज़ और जीवंत स्टेज प्रेज़ेंस से दर्शकों को बांधे रखा। इस दौरान, “सुभान अल्लाह चाँद सिफ़ारिश जो कर्ता”, “लड़कियां क्यों लड़कों सी नहीं होती”, “तन्हा दिल तन्हा सफर”, “चार कदम बस चार कदम” और सदाबहार गीत “यारों दोस्ती बड़ी ही हंसी है” जैसे गानों पर मेडिकल छात्र और डॉक्टर जमकर थिरकते नज़र आए।

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कार्यक्रम की शुरुआत संस्थान के कार्यकारी निदेशक डॉ. राजू अग्रवाल ने दीप प्रज्ज्वलित कर की। उन्होंने इस अवसर पर कहा कि ‘काइज़ेन’ जैसे वार्षिक आयोजन छात्रों को शैक्षणिक तनाव से दूर रहने और अपनी सांस्कृतिक एवं कलात्मक प्रतिभाओं को निखारने का एक महत्वपूर्ण मंच प्रदान करते हैं। उन्होंने शान जैसे प्रतिष्ठित कलाकार के आगमन को संस्थान के लिए गौरव का क्षण बताया।

शान के परफॉर्मेंस के बाद, उपस्थित डॉक्टरों ने अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि शान की आवाज़ और उनके गीतों की ऊर्जा अविस्मरणीय है। एक वरिष्ठ चिकित्सक ने कहा, “देश के मशहूर गायकों में से एक शान की आवाज़ ने हम सभी को पूरी तरह मंत्रमुग्ध कर दिया। यह संगीत-संध्या एम्स पटना के लिए लंबे समय तक याद रखी जाएगी।” छात्रों ने भी कहा कि यह उनके लिए किसी सपने से कम नहीं था कि वे अपने परिसर में शान को लाइव परफॉर्म करते हुए देख रहे हैं।

इस शानदार आयोजन में डीजी (भवन निर्माण) एवं अवर सेवा चयन परिषद के अध्यक्ष आलोक राज, एयरपोर्ट निदेशक सी.के. दिवेदी सहित संस्थान के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. उमेश भदानी, डॉ. संजीव कुमार, डॉ. चंदनी सिन्हा, डॉ. सुशील कुमार और डॉ. अमित पाटिल भी मौजूद रहे और देर रात तक संगीत का लुत्फ़ उठाया। ‘काइज़ेन 2025’ ने एक बार फिर साबित कर दिया कि शैक्षणिक उत्कृष्टता के साथ-साथ सांस्कृतिक और सामाजिक जुड़ाव भी संस्थान के लिए कितना महत्वपूर्ण है।

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