बुजुर्गों में याददाश्त की कमजोरी अब सिर्फ उम्र का असर नहीं मानी जा सकती है। हाल ही में हुए एक बड़े शोध में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि महिलाएं पुरुषों की तुलना में भूलने की समस्या में लगभग तीन गुना ज्यादा प्रभावित होती हैं। लखनऊ के किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी और पीजीआई के विशेषज्ञों ने 350 बुजुर्गों पर अध्ययन किए गए। जिसमें यह पाया कि अकेली या विधवा महिलाओं में मेमोरी लॉस का खतरा और भी बढ़ जाता है। जानिए क्यों महिलाएं मर्दों की तुलना में इतनी जल्दी भुलक्कड़ हो जाती हैं।
शोध में यह खुलासा हुआ है कि महिलाओं में भूलने की समस्या केवल उम्र के साथ नहीं बढ़ती, बल्कि कुपोषण, मानसिक तनाव और अकेलेपन इसके अहम कारण हैं। विधवा या परिवार से अलग रहने वाली महिलाएं इस बीमारी की अधिक शिकार पाई गई हैं। दरअसल, उनका खानपान संतुलित नहीं होता और स्वास्थ्य पर ध्यान कम जाता है। इसके साथ ही इमोशनल और सामाजिक जुड़ाव की कमी दिमाग पर गहरा असर डालती है। शोध के अनुसार, भूलने की बीमारी से पीड़ित महिलाओं में सोचने, निर्णय लेने और तर्क करने की क्षमता भी घट जाती है। KGMU के विशेषज्ञों का कहना है कि अकेले रहने की वजह से पर्याप्त पोषक तत्व न मिलने से दिमाग की कार्यक्षमता धीरे-धीरे कमजोर हो जाती है।
रिसर्च में यह भी सामने आया कि भूलने की बीमारी सिर्फ याददाश्त तक सीमित नहीं है। इससे प्रभावित बुजुर्ग और महिलाएं बार-बार बात भूल जाते हैं। जैसे- चीजें कहीं रखकर भूल जाते हैं, चिड़चिड़ापन और गुस्सा बढ़ जाता है, नींद पूरी नहीं होती या बहुत कम सोते हैं या हर किसी पर शक करने लगते हैं और रोज़मर्रा के कामकाज में भी मुश्किल महसूस करते हैं। साथ ही, उनका ब्लड प्रेशर, शुगर, आंखों की दिक्कत और अन्य शारीरिक बीमारियों का खतरा भी बढ़ जाता है, जिससे उनका जीवन मानसिक और शारीरिक दोनों रूप से प्रभावित होता है।