नए साल की शुरुआत सनातन धर्मावलंबियों के लिए बेहद खास रहने वाली है। जनवरी महीने में ही कई बड़े धार्मिक पर्व और व्रत पड़ रहे हैं, जिनका आध्यात्मिक और ज्योतिषीय दृष्टि से विशेष महत्व है। इस महीने पौष पूर्णिमा से लेकर मकर संक्रांति, मौनी अमावस्या, गुप्त नवरात्र की शुरुआत, बसंत पंचमी और अचला सप्तमी जैसे प्रमुख पर्व मनाए जाएंगे। इन सभी पर्वों के दौरान बनने वाले शुभ योग इनकी महत्ता को और बढ़ा रहे हैं।
दरअसल, इसी के साथ नए साल में कुल चार ग्रहण भी लगने जा रहे हैं। इनमें दो चंद्रग्रहण और दो सूर्यग्रहण शामिल हैं, हालांकि इनमें से केवल एक चंद्रग्रहण ही भारत में दिखाई देगा। ज्योतिषाचार्य राकेश झा के अनुसार, पौष मास की स्नान-दान की पूर्णिमा आज शनिवार को आर्द्रा नक्षत्र और ब्रह्म योग के शुभ संयोग में मनाई जा रही है। पौष पूर्णिमा को सूर्य और चंद्र के मिलन का विशेष दिन माना जाता है। इस अवसर पर सूर्य देव की पूजा और उपासना से जीवन के बंधनों से मुक्ति का मार्ग प्रशस्त होता है। उन्होंने बताया कि इस दिन गंगा, यमुना सहित पवित्र नदियों में स्नान, दान और सूर्य को अर्घ्य देना अत्यंत पुण्यदायी होता है। पौष पूर्णिमा पर गंगा स्नान से तन, मन और आत्मा की शुद्धि होती है। ज्योतिषी झा ने आगे बताया कि 14 जनवरी, बुधवार को माघ कृष्ण एकादशी के दिन अनुराधा नक्षत्र और सर्वार्थ सिद्धि अमृत योग के शुभ संयोग में मकर संक्रांति का पर्व मनाया जाएगा। इसी दिन सूर्य देव मकर राशि में प्रवेश करेंगे, जिससे एक महीने से चला आ रहा खरमास समाप्त हो जाएगा। इसके साथ ही विवाह, गृह प्रवेश और अन्य मांगलिक कार्यों की फिर से शुरुआत हो जाएगी।
मान्यता है कि मकर संक्रांति के दिन गंगा स्नान करने से हजार अश्वमेध यज्ञ के बराबर पुण्य की प्राप्ति होती है। इसी दिन सूर्य दक्षिणायण से उत्तरायण होते हैं, जिससे सकारात्मक ऊर्जा और कार्यक्षमता में वृद्धि होती है। वहीं 23 जनवरी, शुक्रवार को माघ शुक्ल पंचमी के दिन बसंत पंचमी का पर्व मनाया जाएगा। इस अवसर पर विद्या और ज्ञान की देवी मां सरस्वती की पूजा-अर्चना की जाएगी। इस दिन पूर्वभाद्रपद और उत्तरभाद्रपद नक्षत्र का युग्म संयोग बनने के साथ परिघ योग, शिव योग और रवियोग जैसे शुभ योग भी बनेंगे, जो इस पर्व को विशेष फलदायी बनाएंगे।