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राष्ट्रीय जनता दल (RJD) सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव के बड़े बेटे और बिहार के पूर्व मंत्री तेज प्रताप यादव आज बिहार विधानसभा पहुंचे। इस दौरान उन्होंने अपनी मां और पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी के उस बयान का खुलकर समर्थन किया, जिसमें उन्होंने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को “युवा” यानी अपने बेटे निशांत को मुख्यमंत्री बनाने की सलाह दी थी।
तेज प्रताप यादव ने मीडिया से बात करते हुए कहा, “हम शुरू से कह रहे हैं कि नौजवानों को मौका देना चाहिए।” उन्होंने आगे जोड़ा, “मेरी माता जी जो बोली हैं, वह कुछ सोच समझकर ही बोली होंगी।” यह बयान बिहार की राजनीति में नीतीश कुमार के उत्तराधिकारी और युवा नेतृत्व के मुद्दे पर चल रही बहस को और हवा दे सकता है।
बिहार में बढ़ते अपराध के मुद्दे पर भी तेज प्रताप ने सरकार को घेरा। उन्होंने कहा, “बिहार में अपराध चरम पर है और सरकार कुछ नहीं कर रही है, कोई कार्रवाई नहीं कर रही है।” यह टिप्पणी महागठबंधन द्वारा लगातार उठाए जा रहे कानून-व्यवस्था के सवाल को पुख्ता करती है।
चुनाव लड़ने और सरकार गठन पर तेज प्रताप का सस्पेंस
अपने राजनीतिक भविष्य और चुनाव लड़ने को लेकर तेज प्रताप ने कहा कि इसे लेकर “बहुत लोग अलग-अलग तरह से चर्चा कर रहे हैं।” उन्होंने कुछ क्षेत्रों जैसे बख्तियारपुर और महोदी नगर का जिक्र करते हुए कहा कि लोग इन जगहों से उनके चुनाव लड़ने की चर्चा करते रहते हैं। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि वह “महुआ में जहां से भी लोग का डिमांड आएगा वहां से चुनाव लड़ेंगे।” उन्होंने यह भी दावा किया कि उन्होंने महुआ में “बहुत अधिक काम किए हैं।” उन्होंने अपने राजनीतिक संगठन “टीम तेज प्रताप” को अपना झंडा बताया।
सबसे दिलचस्प बात तब सामने आई जब बिहार विधानसभा के सदस्य तेज प्रताप यादव से पूछा गया कि इस बार सरकार किसकी बनेगी। इस सवाल पर उन्होंने केवल इतना कहा कि “देखिए अब सरकार किसकी बनती है।” यह पहली बार है कि तेज प्रताप ने सीधे तौर पर तेजस्वी यादव या राष्ट्रीय जनता दल (RJD) का नाम नहीं लिया, जैसा कि वे आमतौर पर करते हैं। उनके इस जवाब से अटकलें तेज हो गई हैं कि क्या तेज प्रताप अपने छोटे भाई तेजस्वी यादव और पार्टी के मौजूदा नेतृत्व से कुछ नाराज़ हैं। यह चुप्पी बिहार की राजनीतिक गलियारों में एक नई चर्चा का विषय बन गई है।