तेजस्वी यादव ने नए बिहार स्पीकर को दी अनोखी बधाई, नीतीश कुमार का भी किया जिक्र…

Ritu Raj

बीजेपी के वरिष्ठ विधायक प्रेम कुमार निर्विरोध बिहार विधानसभा के नए अध्यक्ष बने हैं। वहीं, सत्ता और विपक्ष दोनों ने समर्थन किया है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव की भूमिका से विधानसभा में सहयोगात्मक माहौल की उम्मीद बढ़ी।

सोमवार को नामांकन की प्रक्रिया के दौरान ही यह स्पष्ट हो गया था कि प्रेम कुमार निर्विरोध बिहार विधानसभा अध्यक्ष चुने जाएंगे, क्योंकि विपक्ष की ओर से किसी ने नामांकन नहीं किया। लंबे समय से राजनीति में सक्रिय और गया से आने वाले प्रेम कुमार को शांत और सुलझे व्यक्तित्व के नेता के रूप में जाना जाता है। अब विधानसभा की कार्यवाही को सुचारू रूप से संचालित करने की जिम्मेदारी उनके कंधों पर होगी। नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने प्रेम कुमार को अध्यक्ष बनाए जाने पर बधाई देते हुए कहा, “प्रेम कुमार को बधाई। आप ज्ञान और मोक्ष की भूमि गया से आते हैं, उस धरती को मेरा नमन। उम्मीद है कि आप पूरे सदन को साथ लेकर आगे बढ़ेंगे। विपक्ष आपका सहयोग करेगा। हमारा उद्देश्य केवल बिहार का विकास है—पलायन और गरीबी मुक्त बिहार बनाना है।” साथ ही अपने बयान में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को भी शुभकामनाएं देते हुए कहा कि मुख्यमंत्री स्वस्थ रहें और बिहार को आगे बढ़ाने में अपना योगदान जारी रखें। आगे यह भी कहा कि सत्ता और विपक्ष को मिलकर काम करना होगा, सदन में मुद्दों पर गंभीरता से चर्चा होनी चाहिए और स्वस्थ परंपराओं को मजबूत किया जाना चाहिए। दरअसल, प्रेम कुमार का निर्विरोध चुना जाना बिहार की राजनीति में एक सकारात्मक संदेश के रूप में देखा जा रहा है। पिछले कुछ समय से राज्य की राजनीति में तनातनी और आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज रहा है, लेकिन विधानसभा के अध्यक्ष पद पर सभी दलों का एक मत होना राजनीतिक सहमति की मिसाल माना जा रहा है। इससे उम्मीद है कि आगामी सत्रों में बहस अधिक रचनात्मक और सार्थक होगी।

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राजनीतिक जानकार मानते हैं कि प्रेम कुमार के अनुभव और शांत नेतृत्व शैली से विधानसभा की कार्यवाही और पारदर्शी व व्यवस्थित हो सकती है। वहीं विपक्ष का सहयोग का भरोसा सत्ता पक्ष और अध्यक्ष दोनों को मजबूत करता है। वहीं, अब यह देखना दिलचस्प होगा कि नए अध्यक्ष किस तरह से विधानसभा की गरिमा और कार्यशैली को नए आयाम देते हैं। क्या वे विवादित मामलों में संतुलित दृष्टिकोण बनाए रख पाएंगे। हालांकि, सियासी समीकरणों और विकास एजेंडा के बीच संतुलन बनाए रखना प्रेम कुमार की सबसे बड़ी चुनौती होगी। यदि यह संभव हुआ, तो बिहार की राजनीति में नए युग की शुरुआत मानी जाएगी।

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