तेजस्वी यादव के ‘कलम बांटो’ अभियान से बिहार की राजनीति गरमाई, विपक्ष और सत्ता पक्ष में तीखी बहस

Deepak Sharma

सिटी पोस्ट लाइव
जैसे-जैसे बिहार विधानसभा चुनाव नज़दीक आ रहे हैं, राज्य की सियासत में गर्मी तेज होती जा रही है। इस बार बहस का केंद्र बना है तेजस्वी यादव का नया राजनीतिक संदेश – “कलम बांटिए, बंदूक नहीं।” पटना के बापू सभागार में युवा राजद द्वारा आयोजित छात्र संसद संवाद कार्यक्रम में तेजस्वी ने हजारों छात्रों के बीच यह संदेश दिया, जिसके बाद बिहार की राजनीति में तूफान आ गया है।

कार्यक्रम में तेजस्वी यादव ने कहा, “हम कमल नहीं, कलम बांट रहे हैं। वे हथियार बांट रहे हैं। यानी वो खुद मान रहे हैं कि बिहार में कानून व्यवस्था नाम की कोई चीज़ नहीं है।” उन्होंने यह भी घोषणा की कि अगर सत्ता में आए तो पटना में 2000 एकड़ में वर्ल्ड क्लास एजुकेशन हब बनाएंगे।

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तेजस्वी के इस बयान के बाद एनडीए ने पलटवार किया। बीजेपी नेता नितिन नवीन ने कटाक्ष करते हुए कहा, “तेजस्वी यादव के पिता लालू प्रसाद लाठी बांटते थे, अब बेटा कलम का ढोंग कर रहा है। जब पढ़ने की उम्र थी तब पढ़े नहीं, अब युवाओं को कलम बांट रहे हैं।” वहीं, जेडीयू प्रवक्ता अभिषेक झा ने कहा कि “बिहार की संस्कृति हमेशा से शिक्षा की रही है, लेकिन राजद जैसी पार्टी के लिए यह बातें केवल दिखावा हैं।”

उधर कांग्रेस प्रवक्ता राजेश राठौर ने तेजस्वी का बचाव करते हुए कहा, “तेजस्वी कलम बांट रहे हैं, बीजेपी तलवार, और नीतीश कुमार बंदूकें। कांग्रेस गांधी की पार्टी है और हमारी लड़ाई कलम से ही होगी।” राजनीति में युवाओं को साधने की यह होड़ दिलचस्प मोड़ ले चुकी है। यह देखना बेहद अहम होगा कि युवा वर्ग तेजस्वी के ‘कलम’ के साथ खड़ा होता है या एनडीए के ‘कानून-व्यवस्था’ के एजेंडे के साथ। चुनाव के नतीजे तय करेंगे कि बिहार में किसका एजेंडा असरदार साबित हुआ।

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