बिहार में लगातार बिगड़ती यातायात व्यवस्था पर लगाम कसने के लिए जिला प्रशासन ने तकनीक का सहारा लेते हुए बड़ा कदम उठाया है। मुजफ्फरपुर शहर को चार जोन और 20 निर्धारित रूटों में बांटते हुए अब इन रूटों पर चलने वाले सभी ऑटो और ई-रिक्शा में क्यूआर कोड लगाना अनिवार्य कर दिया गया है। क्यूआर कोड स्कैन करते ही वाहन और चालक से जुड़ी पूरी जानकारी सामने आ जाएगी, जिससे ट्रैफिक नियंत्रण के साथ-साथ यात्रियों की सुरक्षा और पारदर्शिता सुनिश्चित की जा सकेगी।
शहरी क्षेत्र में कुल 4800 ऑटो और ई-रिक्शा के संचालन की अनुमति दी गई है, जिनमें 4200 वाहन तय रूटों पर चलेंगे, जबकि 600 ऑटो फ्री या रिजर्व जोन में संचालित किए जाएंगे। अब तक रूट से जुड़े स्पष्ट पहचान तंत्र के अभाव में अव्यवस्था बनी रहती थी, लेकिन क्यूआर कोड व्यवस्था लागू होने के बाद यह तुरंत पता चल सकेगा कि कौन-सा ऑटो किस रूट के लिए अधिकृत है। परिवहन विभाग ने क्यूआर कोड जेनरेट करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है और डीटीओ कुमार सत्येंद्र यादव ने बताया कि जल्द ही सभी ऑटो और ई-रिक्शा पर क्यूआर कोड चस्पा कर दिए जाएंगे। इसके साथ ही शहर को चार जोन में बांटते हुए कलर कोडिंग व्यवस्था लागू की गई है, जिससे आम नागरिकों और ट्रैफिक पुलिस को वाहनों की पहचान और निगरानी में आसानी होगी।
हालांकि, नई व्यवस्था के तहत अब ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले ऑटो शहर की सीमा में प्रवेश नहीं कर सकेंगे। इसके लिए बैरिया, जीरोमाइल, मिठनपुरा, रामदयालु और भगवानपुर समेत कई स्थानों पर इंट्री प्वाइंट तय किए गए हैं, जहां से ही वाहनों की निगरानी की जाएगी। हालांकि, आपात स्थिति में मरीज को अस्पताल ले जा रहे ऑटो को इस प्रतिबंध से छूट दी जाएगी। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि जनवरी से नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। इससे साफ संकेत मिलता है कि जिला प्रशासन अब तकनीक और कड़े नियमों के जरिए मुजफ्फरपुर की यातायात व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए पूरी तरह तैयार है।