बिहार में छिड़ा ‘भारत रत्न’ का संग्राम: नीतीश के बाद अब लालू यादव के लिए उठी मांग…

Ritu Raj

सिटी पोस्ट लाइव
बिहार की सियासत में इन दिनों ‘भारत रत्न’ को लेकर एक नई जंग छिड़ गई है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को देश का सर्वोच्च सम्मान देने की मांग के बीच अब राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव का नाम भी रेस में शामिल हो गया है। यह मांग किसी और ने नहीं, बल्कि लालू यादव के बड़े पुत्र और ‘जनशक्ति जनता दल’ के राष्ट्रीय अध्यक्ष तेज प्रताप यादव ने उठाई है।

“दोनों भाइयों को मिले सम्मान”
तेज प्रताप यादव ने पटना में मीडिया से बात करते हुए एक नया सियासी दांव चला है। उन्होंने कहा कि यदि जदयू नेता केसी त्यागी मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के लिए भारत रत्न की मांग कर रहे हैं, तो उनके पिता लालू प्रसाद यादव भी इसके उतने ही हकदार हैं। तेज प्रताप ने तर्क देते हुए कहा, “नीतीश कुमार और मेरे पिता लालू प्रसाद यादव हमेशा से भाई जैसे रहे हैं। अगर लोग कह रहे हैं कि नीतीश जी को यह सम्मान मिलना चाहिए, तो जरूर दें, लेकिन हमारे पिता को क्यों नहीं? हमारी मांग है कि दोनों भाइयों को एक साथ भारत रत्न दिया जाए।”

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पिता के विचारों को जन-जन तक पहुँचाने का संकल्प
अपनी नई पार्टी ‘जनशक्ति जनता दल’ के माध्यम से सामाजिक न्याय की लड़ाई तेज करने का दावा करते हुए तेज प्रताप ने कहा कि वह अपने पिता के विचारों को जन-जन तक फैलाने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा देंगे। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से औपचारिक रूप से मांग की है कि लालू यादव के संघर्षों और पिछड़ों के उत्थान में उनके योगदान को देखते हुए उन्हें भारत रत्न से नवाजा जाए।

सियासी विस्तार और चुनावी हुंकार
भारत रत्न की मांग के साथ-साथ तेज प्रताप यादव ने अपनी नई पार्टी के विस्तार को लेकर भी बड़ा ऐलान किया है। उन्होंने दावा किया कि ‘जनशक्ति जनता दल’ अब केवल बिहार तक सीमित नहीं रहेगी। आने वाले समय में उनकी पार्टी उत्तर प्रदेश, बंगाल, दिल्ली और केरल सहित उन तमाम राज्यों में चुनाव लड़ेगी जहाँ चुनाव होने वाले हैं। तेज प्रताप ने स्पष्ट किया कि उनकी पार्टी सामाजिक न्याय के मुद्दे पर किसी से समझौता नहीं करेगी।

क्या है इस मांग के मायने?
राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि तेज प्रताप की यह मांग नीतीश कुमार की बढ़ती लोकप्रियता और जदयू की ओर से किए जा रहे दावों की काट है। हालांकि, तेज प्रताप इन दिनों राजद और अपने परिवार से वैचारिक दूरियां बनाए हुए हैं और अपनी अलग पार्टी चला रहे हैं, लेकिन पिता लालू यादव के सम्मान को मुद्दा बनाकर वे एक बार फिर मुख्यधारा की राजनीति में अपनी उपस्थिति दर्ज कराना चाहते हैं।

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