सिटी पोस्ट लाइव
बिहार की राजनीति के चर्चित चेहरे और पूर्णिया से निर्दलीय सांसद राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव की गिरफ्तारी के बाद चल रहे हाई-वोल्टेज ड्रामे में एक नया मोड़ आया है। पटना की विशेष एमपी-एमएलए कोर्ट ने पप्पू यादव की सेहत को ध्यान में रखते हुए उन्हें न्यायिक हिरासत में रखने का आदेश जारी किया है। अब इस पूरे मामले पर अदालत सोमवार को विस्तृत सुनवाई करेगी।
31 साल पुराने मामले में एक्शन
पप्पू यादव की यह गिरफ्तारी किसी नए विवाद में नहीं, बल्कि तीन दशक से भी अधिक पुराने यानी 31 साल पुराने एक मामले में हुई है। पटना के मन्दिरी स्थित उनके आवास पर 6 फरवरी की रात करीब 10:30 बजे पुलिस टीम पहुंची थी। कोर्ट ने उनके खिलाफ गिरफ्तारी और संपत्ति की कुर्की का वारंट जारी किया था, जिसके बाद पुलिस ने यह कार्रवाई सुनिश्चित की।
पप्पू यादव की गिरफ्तारी की खबर जंगल में आग की तरह फैली, जिसके बाद उनके आवास के बाहर भारी संख्या में समर्थक जमा हो गए। समर्थकों ने सरकार और पुलिस प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। समर्थकों का आरोप है कि जानबूझकर पुराने मामलों को कुरेदकर उन्हें निशाना बनाया जा रहा है क्योंकि वे जनता और पीड़ितों की आवाज उठा रहे हैं।
गिरफ्तारी के बाद पप्पू यादव ने अपनी खराब सेहत का हवाला दिया था। पुलिस उन्हें लेकर अस्पताल पहुंची थी, जहां उनकी जांच की गई। कोर्ट ने उनकी स्थिति और मेडिकल रिपोर्ट्स को देखते हुए उन्हें फिलहाल जेल के बजाय मेडिकल कस्टडी (अस्पताल में पुलिस की निगरानी) में रखने का निर्देश दिया है। यह पप्पू यादव के लिए एक तात्कालिक राहत मानी जा रही है।
अदालत अब इस मामले की कानूनी बारीकियों और पप्पू यादव द्वारा दी गई दलीलों पर सोमवार को सुनवाई करेगी। विपक्ष के नेताओं ने इस गिरफ्तारी को लोकतंत्र की हत्या बताया है, जबकि प्रशासन इसे एक लंबित न्यायिक प्रक्रिया की पूर्ति कह रहा है। सोमवार की सुनवाई यह तय करेगी कि पप्पू यादव को जमानत मिलती है या उन्हें जेल जाना होगा।