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डूसू चुनाव 2025 में ABVP ने जीत हासिल की है। तो आज हम बात करेंगे कि चुनाव जीतने वालों को क्या-क्या सुविधाएं मिलती है और पहला चुनाव कब आयोजित हुआ था। अरूण जेटली से लेकर अलका लांबा तक कई नामी चेहरे शामिल है।
डूसू चुनाव 2025 में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) ने जीत की हैट्रिक लगाई है। पार्टी को अध्यक्ष, सचिव और संयुक्त सचिव पद पर जीत मिली है। आर्यन मान दिल्ली यूनिवर्सिटी के नए अध्यक्ष बने हैं। उन्होंने NSUI की उम्मीदवार जोसलिन नंदिता चौधरी को 16,196 वोटों से हराया है।

दरअसल, दिल्ली यूनिवर्सिटी छात्र संघ (DUSU) एक छात्र संघ है, जिसके अंदर करीब 91 कॉलेज आते है। वहीं, साल 1949 में इसकी स्थापना हुई थी, लेकिन पहला चुनाव 1954 में हुआ था। बता दें, गजराज बहादुर नागर डूसू के पहले अध्यक्ष चुने गए थे। हालांकि, दिल्ली यूनिवर्सिटी छात्र संघ के लिए चार पदों में पर चुनाव होता है। इसमें अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, सचिव और संयुक्त सचिव पद शामिल होता है। इनमें अध्यक्ष पद को सबसे पावरफुल माना जाता है। वहीं, अध्यक्ष का काम छात्रों की समस्यओं को सुनना, मुद्दों को उठाना और यूनिवर्सिटी प्रशासन तक उनकी बात पहुंचाना होता है। साथ ही पदाधिकारियों का कार्यकाल 11 महीने का होता है। और 12 महीने में दिल्ली यूनिवर्सिटी छात्र संघ को चुनाव करना पड़ता है।

इसके अलावा यहां के प्रेसिडेंस को यूनिवर्सिटी के अंदर एक अलग से ऑफिस दिया जाता है। वह यूनवर्सिटी में तमाम फैसलों में शामिल रहता है। छात्रों के हित में वह यूनिवर्सिटी प्रशासन के किसी भी फैसले पर आपत्ति जता सकता है। और जरूरी विषयों पर विश्वविद्यालय प्राधिकारियों के साथ विचार-विमर्श कर उस समस्या का हल करता है। 1954 से लेकर अब तक कई ऐसे नेता हुए जिनकी शुरूआत डूसू चुनाव से हुई। इनमें गजराज बहादुर नागर, अरुण जेटली, अजय माकन, विजय गोयल और अल्का लांबा जैसे बड़े चेहरे शामिल है।

गौरतलब है कि दिल्ली यूनिवर्सिटी के अध्यक्ष को कोई वेतन नहीं मिलता, लेकिन संगठन को करीब 20 लाख रुपये का फंड जरूर दिया जाता है। जिसे अध्यक्ष को सांस्कृतिक गतिविधि, इवेंट और रिसर्च पर खर्च करना होता है। डूसू के पूर्व प्रेसिडेंट रौनक खत्री के मुताबिक, डूसू के चारों पदाधिकारियों को 5-5 लाख रुपये दिए जाते हैं। यह पैसा उनके खाते में नहीं होता, बल्कि एक कमेटी के पास होता है।