दूसरे विश्व युद्ध से जुड़ी है बियर की हरी बोतल की कहानी,जानें क्यों बियर के लिए ‘दुश्मन’ है सूरज की रोशनी…

Ritu Raj

क्या आपने कभी सोचा है कि बियर की ज्यादातर बोतलें ‘रंगीन’ क्यों होती हैं? कांच की पारदर्शी बोतलों में बियर ज्यादा साफ और आकर्षक लग सकती थी, लेकिन फिर भी कंपनियां भूरे या हरे रंग को ही चुनती हैं। इसके पीछे कोई फैशन नहीं, बल्कि शुद्ध विज्ञान (Science) और एक ऐतिहासिक मजबूरी छिपी है।

बियर बनाने में ‘हॉप्स’ (Hops) का इस्तेमाल होता है, जो इसे खास स्वाद और खुशबू देते हैं। समस्या तब शुरू होती है जब सूरज की अल्ट्रावायलेट (UV) किरणें इन हॉप्स के साथ संपर्क करती हैं।

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केमिकल रिएक्शन: धूप लगते ही बियर के भीतर एक रासायनिक प्रतिक्रिया होती है।
नतीजा: इससे बियर में से अजीब सी दुर्गंध आने लगती है, जिसे एक्सपर्ट्स ‘स्कंक’ (Skunked) स्मेल कहते हैं। यानी आपकी ताजी बियर कुछ ही देर में पीने लायक नहीं रहती।

रिसर्च में पाया गया कि भूरा (Brown) रंग UV किरणों को रोकने में सबसे ज्यादा सक्षम है। यह एक ढाल की तरह काम करता है, जो रोशनी को बियर के स्वाद से खिलवाड़ नहीं करने देता। इसीलिए सालों तक भूरी बोतलें इंडस्ट्री का स्टैंडर्ड बनी रहीं। वहीं, द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान भूरे कांच की भारी कमी हो गई। बियर कंपनियों के पास दो ही रास्ते थे—या तो पारदर्शी बोतल इस्तेमाल करें (जिससे बियर खराब हो जाती) या कोई नया विकल्प खोजें। ऐसे में कंपनियों ने हरे रंग (Green) की बोतलों का सहारा लिया। हालांकि हरा रंग भूरे जितना असरदार नहीं था, लेकिन यह पारदर्शी कांच से कहीं बेहतर था। युद्ध के बाद, कई प्रीमियम ब्रांड्स ने इसे अपनी पहचान बना लिया और आज हरा रंग ‘क्लासिक और प्रीमियम’ लुक का प्रतीक बन गया है।

पारदर्शी बोतलें क्यों नहीं?
सफेद या पारदर्शी कांच की बोतलें UV किरणों को बिल्कुल नहीं रोक पातीं। आज जो भी ब्रांड पारदर्शी बोतलों का इस्तेमाल करते हैं, वे या तो अपनी बियर में केमिकली ट्रीटेड हॉप्स डालते हैं ताकि रोशनी का असर न हो, या फिर उन्हें अंधेरे में रखने की सलाह देते हैं।

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