UGC का बड़ा फैसला: देश के सभी कॉलेजों में अब ‘जातिवाद’ पर लगाम, 15 जनवरी से लागू हुए समानता के सख्त नियम…

Ritu Raj

देश के उच्च शिक्षा परिदृश्य में एक ऐसा मोड़ आया है जिसने न केवल अकादमिक जगत, बल्कि राजनीतिक गलियारों में भी हलचल तेज कर दी है। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) ने 15 जनवरी 2026 से ‘उच्च शिक्षण संस्थानों में समानता को बढ़ावा देने के नियम, 2026’ लागू कर दिए हैं। यह रेगुलेशन रोहित वेमुला और पायल तडवी जैसे मामलों के बाद उपजे दशकों पुराने दर्द का कानूनी उपचार माना जा रहा है।

क्या हैं नए नियम?
प्रमुख प्रावधान इस प्रकार हैं:
1) समान अवसर केंद्र: हर यूनिवर्सिटी और कॉलेज में एक ‘इक्विटी सेंटर’ बनाना अनिवार्य होगा।
2) इक्विटी कमेटी: शिकायतों की जांच के लिए एक कमेटी बनेगी जिसमें SC, ST, OBC, दिव्यांग और महिलाओं का प्रतिनिधित्व अनिवार्य है।
3) 24×7 हेल्पलाइन: शिकायतकर्ता अपनी पहचान गुप्त रखकर 24 घंटे सक्रिय हेल्पलाइन पर शिकायत कर सकेंगे।
4) सख्त कार्रवाई: नियमों के उल्लंघन पर UGC संस्थान की मान्यता रद्द कर सकता है या अनुदान (Grant) रोक सकता है।
नोट: UGC के ये नए नियम केवल छात्रों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि इसमें शिक्षक और प्रशासनिक कर्मचारी भी शामिल हैं।

पुश नोटिफिकेशन के लिए सब्सक्राइब करें।

दरअसल, इस बार सबसे बड़ा बदलाव यह है कि OBC छात्रों और शिक्षकों को भी जातिगत भेदभाव की शिकायत दर्ज कराने का अधिकार दिया गया है। पहले यह सुरक्षा मुख्य रूप से SC/ST वर्ग तक सीमित थी। लेकिन, यही बिंदु विवाद की जड़ भी बन गया है। जयपुर से लेकर सोशल मीडिया तक, सवर्ण संगठनों ने मोर्चा खोल दिया है। इसे “दूसरा SC/ST एक्ट” करार देते हुए छात्र पूछ रहे हैं कि अगर सामान्य वर्ग का छात्र भेदभाव का शिकार हो, तो उसकी सुरक्षा की गारंटी कहाँ है? यह मुद्दा केवल कैंपस तक सीमित नहीं है। उत्तर प्रदेश में 2027 के चुनावों से पहले इस रेगुलेशन ने राजनीतिक तपिश बढ़ा दी है। जहाँ सामाजिक न्याय की पक्षधर पार्टियाँ इसे ऐतिहासिक सुधार बता रही हैं, वहीं अगड़ी जातियों में बढ़ता असंतोष भाजपा और अन्य दलों के लिए चुनावी गणित बिगाड़ सकता है।

बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने 2012 के पुराने नियमों को नाकाफी माना था। हैदराबाद सेंट्रल यूनिवर्सिटी की त्रासदी (रोहित वेमुला मामला) ने यह कड़वा सवाल खड़ा किया था कि क्या आज भी इंसान की काबिलियत उसकी जाति से नीचे है? इसी दबाव के बाद 2026 का यह सख्त गजट लागू हुआ है।

Share This Article