वैलेंटाइन वीक का फिल्मी यू-टर्न: रात को भरी मांग, सुबह चौखट पर छोड़ा साथ… आखिर क्यों बदल गए दूल्हे के तेवर?…

Ritu Raj

वैलेंटाइन वीक में जहां दुनिया लाल गुलाब और वादों में डूबी थी, बिहार के नालंदा में इश्क ने एक ऐसा मोड़ लिया जिसने पूरे गांव को पंचायत की दरी पर ला खड़ा किया। यह कहानी है नूरसराय थाना क्षेत्र के खरजमा गांव की, जहां राहुल पासवान और उनकी प्रेमिका के बीच 3 साल से चल रहा ‘इश्क का मीटर’ अचानक ओवरलोड हो गया।

आधी रात का इकरार, सुबह का इनकार;
किस्सा बुधवार की रात का है। राहुल ने फिल्मी अंदाज में अपनी प्रेमिका के घर दस्तक दी और सरेआम मांग भरकर उसे अपनी पत्नी स्वीकार कर लिया। रात भर कसमें खाई गईं, ‘जीने-मरने’ के वादे हुए। लेकिन जैसे ही सूरज की पहली किरण पड़ी, राहुल के हौसले पस्त होने लगे।

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विवाद की टाइमलाइन:
बुधवार रात: राहुल ने युवती के घर जाकर मांग भरी और वहीं रुक गया।
गुरुवार सुबह: दूल्हा अपनी दुल्हन को लेकर अपने घर पहुंचा, लेकिन घर वालों ने ‘नो एंट्री’ का बोर्ड लगा दिया।
गुरुवार रात: बेचारी दुल्हन रात भर ससुराल की चौखट पर बैठी रही, मगर पत्थर दिल परिजन नहीं पसीजे।

जब चौखट से उठकर मामला ‘पंचायत’ पहुंचा;
शुक्रवार को यह मामला तब गरमाया जब युवती के परिजन ग्रामीणों के साथ लड़के के घर धमक पड़े। बात बढ़ी, बहस हुई और अंततः मामला पंचायत की मेज पर जा टिका। मुखिया, सरपंच और जिला परिषद प्रतिनिधि की मौजूदगी में घंटों पंचायत चली। फिलहाल कोई ठोस नतीजा नहीं निकला है। तय हुआ है कि 20 फरवरी को जब लड़की के पिता (चेन्नई से) और लड़के के दादा (बक्सर से) आएंगे, तभी ‘महापंचायत’ में आखिरी फैसला होगा।

पुलिस का रुख और बड़ा सवाल;
स्थानीय थानाध्यक्ष का कहना है कि अभी तक किसी भी पक्ष ने लिखित शिकायत नहीं दी है। आवेदन मिलते ही कानूनी कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल दुल्हन अपने मायके लौट गई है और राहुल का ‘वैलेंटाइन प्रॉमिस’ कागजों और पंचायत की तारीखों में उलझ गया है। यह घटना एक कड़वा सवाल छोड़ जाती है: क्या सिर्फ सिंदूर भर देना ही मोहब्बत है, या उस सिंदूर की मर्यादा निभाने का दम रखना असली इश्क है?;

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