सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी: आवारा कुत्तों से सड़कें खाली रखनी होंगी, हादसों का बन रहे हैं कारण…

Ritu Raj

सुप्रीम कोर्ट में बुधवार को आवारा कुत्तों के मुद्दे पर सुनवाई के दौरान बहस काफी तीखी हो गई। कोर्ट में कुत्तों के मूड, काउंसलिंग, कम्युनिटी डॉग्स और इंस्टीट्यूशनलाइज्ड डॉग्स जैसे शब्दों पर भी चर्चा हुई।

जस्टिस विक्रम नाथ ने साफ कहा कि मामला सिर्फ कुत्तों के काटने तक सीमित नहीं है, बल्कि सड़क दुर्घटनाओं का भी बड़ा खतरा है। उन्होंने कहा कि आवारा कुत्तों से सड़कें सुरक्षित रहनी चाहिएं, क्योंकि यह पहचानना मुश्किल है कि कौन सा कुत्ता किस मूड में है। आवारा कुत्तों के पक्ष में दलील देते हुए वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने कहा कि मंदिरों जैसे स्थानों पर जाने के दौरान उन्हें कभी कुत्ते ने नहीं काटा। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने टिप्पणी की—“आप खुशकिस्मत हैं, लेकिन लोग और बच्चे काटे जा रहे हैं, यहां तक कि मौतें भी हो रही हैं।” कपिल सिब्बल ने सुझाव दिया कि कुत्ता काटने की घटना होने पर उसे पकड़कर नसबंदी कर वापस उसी इलाके में छोड़ा जाए। इस पर कोर्ट ने तंज कसते हुए कहा कि अब बस कुत्तों की काउंसलिंग ही बाकी रह गई है, ताकि वे दोबारा न काटें।

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वहीं सीनियर एडवोकेट केके वेणुगोपाल ने बताया कि NALSAR हैदराबाद में एनिमल लॉ सेंटर है, जहां एनिमल प्रोटेक्शन से जुड़े कोर्स चलते हैं और हार्वर्ड यूनिवर्सिटी से MoU भी है। उन्होंने कहा कि जांच में ऐसे नए आंकड़े सामने आए हैं, जो पहले कोर्ट के सामने नहीं रखे गए थे।

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