बिहार में जनगणना 2027 की प्रक्रिया की शुरुआत हो गई है। राजधानी पटना में जिला प्रशासन ने इसकी पूरी तैयारी कर ली है। शुक्रवार सुबह मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने इस अभियान के तहत राज्य में स्व-गणना (Self Enumeration) की शुरुआत की, जबकि पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने भी पटना स्थित अपने आवास से ऑनलाइन पंजीकरण कर इसमें भाग लिया। प्रशासन का कहना है कि यह देश का एक बेहद महत्वपूर्ण और व्यापक अभियान है, जिसे समय पर, सटीक और बिना त्रुटि के पूरा करना सर्वोच्च प्राथमिकता है।

दरअसल, यह जनगणना दो चरणों में पूरी की जाएगी। पहले चरण में मकान सूचीकरण होगा, जिसमें घर की स्थिति, उपलब्ध सुविधाएं जैसे पानी, बिजली और शौचालय आदि की जानकारी एकत्र की जाएगी। दूसरे चरण में जनसंख्या गणना होगी, जिसमें परिवार के हर सदस्य की व्यक्तिगत जानकारी जैसे नाम, उम्र, शिक्षा, धर्म और पेशा दर्ज की जाएगी। फॉर्म भरने के लिए लोगों के पास दो विकल्प हैं। पहला है ऑनलाइन स्व-गणना, जिसमें नागरिक आधिकारिक पोर्टल पर जाकर मोबाइल नंबर से रजिस्ट्रेशन कर सकते हैं, OTP के जरिए लॉगिन कर अपनी और परिवार की जानकारी भर सकते हैं। फॉर्म जमा करने के बाद एक रेफरेंस नंबर मिलता है, जिसे बाद में आने वाले प्रगणक को दिखाना होता है। दूसरा तरीका ऑफलाइन है, जिसमें सरकारी कर्मचारी घर-घर जाकर जानकारी इकट्ठा करेंगे और अपने डिवाइस में दर्ज करेंगे। फॉर्म भरते समय घर से जुड़ी जानकारी (जैसे कमरों की संख्या, पानी का स्रोत, बिजली, ईंधन आदि) और व्यक्तिगत जानकारी (नाम, जन्म तिथि, वैवाहिक स्थिति, धर्म) के साथ-साथ शिक्षा, रोजगार और प्रवासन से संबंधित विवरण भी देना होगा। प्रशासन के अनुसार, जनगणना लोकतंत्र की नींव है क्योंकि इसके आंकड़ों के आधार पर ही सरकार विकास योजनाएं और नीतियां तैयार करती है। इसलिए हर नागरिक की भागीदारी जरूरी है।

इस बार 17 अप्रैल से 1 मई 2026 तक स्व-गणना की सुविधा उपलब्ध रहेगी। इसके बाद 2 मई से 31 मई तक घर-घर जाकर मकान सूचीकरण और आवास गणना का कार्य किया जाएगा। खास बात यह है कि इस बार बड़े स्तर पर डिजिटल तकनीक का उपयोग किया जा रहा है, जिससे डेटा संग्रहण अधिक तेज, पारदर्शी और सटीक होगा। जनगणना को सफल बनाने के लिए कर्मचारियों को बड़े पैमाने पर प्रशिक्षित किया जा रहा है। उन्हें डेटा संग्रह की प्रक्रिया, फॉर्म भरने के तरीके और मोबाइल ऐप के उपयोग की जानकारी दी जा रही है। पटना जिले में इस कार्य के लिए हजारों कर्मचारियों की तैनाती की गई है, जिनमें प्रगणक, पर्यवेक्षक और फील्ड ट्रेनर शामिल हैं। साथ ही, एक जिला स्तरीय समिति और जनगणना कोषांग द्वारा पूरे अभियान की निगरानी की जा रही है। प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया है कि जनगणना के दौरान जुटाई गई सभी जानकारी पूरी तरह गोपनीय रहेगी और इसका उपयोग केवल सरकारी योजनाओं के निर्माण में किया जाएगा। साथ ही अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि इस कार्य में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।