बिहार की राजनीति और मोकामा विधानसभा क्षेत्र से एक बड़ी खबर सामने आ रही है। बाहुबली विधायक और जनता दल यूनाइटेड (JDU) के दिग्गज नेता अनंत सिंह ने घोषणा की है कि वह 2030 का विधानसभा चुनाव नहीं लड़ेंगे। राज्यसभा चुनाव के लिए वोट डालने बेऊर जेल से विधानसभा पहुंचे अनंत सिंह ने स्पष्ट किया कि अब उनकी राजनीतिक विरासत उनके बेटे संभालेंगे।

अनंत सिंह ने साफ कर दिया है कि उनके स्थान पर अब उनके बेटे चुनावी मैदान में उतरेंगे। गौर करने वाली बात है कि करीब दो महीने पहले ही उनके बेटों(अंकित और अभिषेक) ने अपनी मां नीलम देवी के साथ मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से मुलाकात की थी, तभी से उनके राजनीति में आने की अटकलें तेज थीं। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने की चर्चाओं पर प्रतिक्रिया देते हुए अनंत सिंह थोड़े भावुक नजर आए। उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार भले ही राज्यसभा जाएं, लेकिन वह हमेशा उनके नेता बने रहेंगे। साथ ही, उन्होंने नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार की तारीफ करते हुए कहा कि उनमें मुख्यमंत्री बनने के सभी गुण मौजूद हैं। हालांकि अनंत सिंह चुनाव नहीं लड़ेंगे, लेकिन उन्होंने राजनीति से पूरी तरह संन्यास लेने की बात को खारिज कर दिया है। उन्होंने कहा, “मैं जनता के बीच रहूंगा और उनकी सेवा करता रहूंगा, बस सदन का चुनाव नहीं लड़ूंगा।”
गौरतलब है कि अनंत सिंह की यह घोषणा ऐसे समय में आई है जब वह कानूनी मुश्किलों से घिरे हुए हैं। उन्होंने पिछले साल 30 अक्टूबर को जनसुराज पार्टी के प्रचार के दौरान दुलारचंद यादव की हत्या हुई थी। परिजनों ने आरोप लगाया था कि यह हत्या अनंत सिंह के समर्थकों ने एक सोची-समझी साजिश के तहत की है। इसके बाद पटना पुलिस ने उन पर प्राथमिकी दर्ज की और उन्हें गिरफ्तार किया गया। दिलचस्प बात यह है कि अनंत सिंह ने जेल में रहते हुए ही चुनाव लड़ा और जीत हासिल की। फिलहाल वह बेऊर जेल में बंद हैं, लेकिन उन्होंने जल्द ही बाहर आने का भरोसा जताया है।
भविष्य की रणनीति;
अनंत सिंह का यह कदम मोकामा की राजनीति में एक नए युग की शुरुआत माना जा रहा है। एक तरफ जहां वह खुद को चुनावी राजनीति से दूर कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ अपने बेटों को नीतीश कुमार के सानिध्य में ‘लॉन्च’ करने की तैयारी कर चुके हैं।