उत्तर प्रदेश के मेरठ की गलियों से निकला एक युवा सितारा जब लखनऊ के इकाना स्टेडियम में उतरा, तो नवाबों के शहर में सिर्फ उसी के नाम का शोर गूँजा। IPL 2026 के पाँचवें मुकाबले में समीर रिजवी ने वह कर दिखाया, जिसकी उम्मीद दिल्ली कैपिटल्स के कट्टर प्रशंसकों ने भी छोड़ दी थी।
तबाही के बीच रक्षक बनकर उभरे रिजवी;
लखनऊ सुपर जायंट्स ने दिल्ली के सामने 142 रनों का छोटा सा लक्ष्य रखा था, लेकिन कहानी में ट्विस्ट तब आया जब मोहम्मद शमी ने पहली ही गेंद पर केएल राहुल को पवेलियन भेज दिया। देखते ही देखते दिल्ली का स्कोर 26 रन पर 4 विकेट हो गया। स्टेडियम में सन्नाटा था, तभी दिल्ली ने अपने ट्रम्प कार्ड यानी ‘इम्पैक्ट प्लेयर’ के रूप में समीर रिजवी को मैदान पर उतारा।

शून्य से शिखर तक का सफर;
रिजवी की पारी की शुरुआत किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं थी। लखनऊ के गेंदबाज आग उगल रहे थे और समीर एक समय 9 गेंदों में 0 और 13 गेंदों में महज 5 रन बनाकर संघर्ष कर रहे थे। लेकिन जैसे ही उनकी आँखें जमीं, मेरठ का यह बल्लेबाज ‘सुनामी’ बन गया। समीर ने 47 गेदों पर 4 छक्के और 5 चौके की मदद से नाबाद 70 रन बनाकर टीम को जीत दिलाई। ट्रिस्टन स्टब्स के साथ मिलकर न केवल पारी को संभाला, बल्कि स्पिनर्स की बखिया उधेड़ते हुए लखनऊ के हाथों से मैच छीन लिया।

मेरठ से आईपीएल के मंच तक;
समीर की इस कामयाबी के पीछे उनके पिता हसीन रिजवी (प्रॉपर्टी डीलर) का संघर्ष और उनके मामा तंकीब अख्तर का मार्गदर्शन है। समीर का जन्म 6 दिसंबर 2003 को मेरठ (भारतीय क्रिकेट की नर्सरी) में हुआ था। उनका बचपन आर्थिक तंगियों से काफी गुजरा, इसके बावजूद भी पिता ने अपने बेटे के सपनों को टूटने नहीं दिया। इसके अलावा उनके गुरू मामा तंकीब अख्तर ने बचपन में ही समीर की काबिलियत पहचान ली थी और उन्हें तराशना शुरू किया।

घरेलू क्रिकेट का ‘सिक्सर किंग’;
समीर रिजवी रातों-रात स्टार नहीं बने, बल्कि उनके आँकड़े गवाह हैं।
डेब्यू: 2020 में उत्तर प्रदेश के लिए फर्स्ट क्लास क्रिकेट की शुरुआत।
यूपी टी20 लीग (2023): 455 रन बनाए और 35 छक्के जड़कर चयनकर्ताओं को हैरान कर दिया।
नीलामी का उतार-चढ़ाव: 2024 में CSK ने उन्हें 8.4 करोड़ में खरीदा था। हालांकि, 2025 की मेगा नीलामी में दिल्ली कैपिटल्स ने उन्हें 95 लाख में अपनी टीम का हिस्सा बनाया।