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बिहार की राजनीति में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। चर्चा तेज है कि मुख्यमंत्री नितीश कुमार राज्य की सक्रिय राजनीति से दूरी बनाकर केंद्र की राजनीति में जाने की तैयारी कर रहे हैं। सूत्रों के अनुसार, वे राज्यसभा के लिए नामांकन दाखिल कर सकते हैं। बताया जा रहा है कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की मौजूदगी में यह प्रक्रिया पूरी हो सकती है। राज्यसभा चुनाव 16 मार्च को होना है और उसी दिन इसके परिणाम भी घोषित किए जाएंगे।
अगर यह फैसला होता है तो बिहार की राजनीति में बड़ा बदलाव तय माना जा रहा है। माना जा रहा है कि इसके बाद राज्य में मुख्यमंत्री पद भारतीय जनता पार्टी (Bharatiya Janata Party) के पास जा सकता है। ऐसे में बिहार के अगले मुख्यमंत्री को लेकर सियासी गलियारों में चर्चा तेज हो गई है। फिलहाल बीजेपी के तीन बड़े नेताओं के नाम सबसे ज्यादा चर्चा में हैं।
सम्राट चौधरी:
सबसे पहले नाम बिहार के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी का लिया जा रहा है। मुंगेर के लखनपुर में जन्मे सम्राट चौधरी बिहार बीजेपी के प्रमुख चेहरों में गिने जाते हैं। उनके पिता शकुनी चौधरी भी राज्य की राजनीति के बड़े नेता रहे हैं। सम्राट चौधरी ने अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत 1990 में की थी। वे पहले राष्ट्रीय जनता दल से जुड़े रहे और राबड़ी देवी तथा जीतन राम मांझी की सरकार में मंत्री भी रह चुके हैं। 2014 में उन्होंने आरजेडी छोड़कर बीजेपी का दामन थाम लिया। जातीय समीकरण की बात करें तो वे कोइरी/कुशवाहा समाज से आते हैं, जो बिहार की राजनीति में महत्वपूर्ण वोट बैंक माना जाता है।
नित्यानंद राय:
दूसरा प्रमुख नाम केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय का है। वे उजियारपुर लोकसभा क्षेत्र से सांसद हैं और हालिया चुनाव में उन्होंने राजद के उम्मीदवार को हराकर अपनी राजनीतिक ताकत दिखाई थी। नित्यानंद राय साल 2000 से सक्रिय राजनीति में हैं और बिहार बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष भी रह चुके हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यादव समुदाय में उनकी मजबूत पकड़ उन्हें मुख्यमंत्री पद की दौड़ में एक मजबूत दावेदार बनाती है।
डॉ. दिलीप जायसवाल:
तीसरा नाम बिहार बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष दिलीप जायसवाल का सामने आ रहा है। खगड़िया में जन्मे दिलीप जायसवाल लंबे समय से पार्टी संगठन में सक्रिय हैं। वे करीब 22 वर्षों तक पार्टी के प्रदेश कोषाध्यक्ष रहे हैं और नीतीश सरकार में मंत्री पद भी संभाल चुके हैं।
वे कलवार जाति से आते हैं, जो अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) का हिस्सा है। सीमांचल क्षेत्र में उनकी मजबूत पकड़ भी उन्हें इस दौड़ में अहम बनाती है।
अगर नीतीश कुमार राज्यसभा जाते हैं तो बिहार की सियासत में नया समीकरण बनना तय माना जा रहा है। अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि 16 मार्च के बाद बिहार की सत्ता किस नेता के हाथों में जाती है और बीजेपी किस सामाजिक समीकरण के साथ 2025 के विधानसभा चुनाव की तैयारी करती है।