सिटी पोस्ट लाइव
बिहार की राजनीति में साढ़े तीन दशकों से हाशिए पर रही कांग्रेस पार्टी अब वापसी की कोशिश में है। राहुल गांधी की 16 दिवसीय ‘वोटर अधिकार यात्रा’ के समापन के बाद यह सवाल उठ रहा है कि क्या इस यात्रा ने बिहार में कांग्रेस की ‘बार्गेनिंग पावर’ (सौदेबाजी की ताकत) बढ़ा दी है? यदि ऐसा है, तो इसका सीधा असर भविष्य में महागठबंधन के भीतर सीट शेयरिंग पर पड़ेगा।
एसआईआर (SIR) प्रक्रिया के खिलाफ शुरू हुई यह यात्रा लगभग 1300 किलोमीटर का सफर तय कर 23 जिलों से होकर गुजरी और सोमवार को पटना के गांधी मैदान में इंडिया ब्लॉक के एक बड़े शक्ति प्रदर्शन के साथ समाप्त हुई। इस दौरान राहुल गांधी ने एसआईआर को ‘वोट चोरी’ बताते हुए न केवल चुनाव आयोग पर निशाना साधा, बल्कि बिहार विधानसभा चुनाव से पहले बीजेपी और उसके सहयोगियों पर भी गंभीर आरोप लगाए।
इस यात्रा में राहुल गांधी के साथ बिहार के नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव, वीआईपी प्रमुख मुकेश सहनी और माले महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य भी मौजूद रहे। राहुल और तेजस्वी एक ही गाड़ी में सवार होकर पूरे बिहार में घूमते नजर आए, एनडीए के खिलाफ माहौल बनाते हुए उन्होंने 2025 के चुनावी युद्ध की रणनीति तैयार करने की कोशिश की।
110 विधानसभा सीटों को किया कवर
‘वोटर अधिकार यात्रा’ ने लगभग 110 से अधिक विधानसभा सीटों को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से कवर किया। यह यात्रा 17 अगस्त को सासाराम से शुरू होकर औरंगाबाद, गया, नवादा, नालंदा, मुंगेर, भागलपुर, कटिहार, पूर्णिया, दरभंगा, चंपारण और आरा जैसे महत्वपूर्ण जिलों से गुजरी और पटना में समाप्त हुई।
इन 110 सीटों में से लगभग 80 सीटें वर्तमान में एनडीए के पास हैं, जबकि महागठबंधन के पास केवल 30 सीटें हैं। इस तरह, राहुल और तेजस्वी ने एनडीए के मजबूत गढ़ों में अपनी यात्रा के माध्यम से राजनीतिक माहौल बदलने का प्रयास किया है।
कांग्रेस की बढ़ी ‘बार्गेनिंग पावर’
बिहार में जिस तरह से राहुल गांधी ने खुद जमीन पर उतरकर इस पूरे अभियान का नेतृत्व किया, वह पहले किसी अन्य राज्य में कम ही देखने को मिला है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि लंबे समय बाद बिहार में कांग्रेस के समर्थक, कार्यकर्ता और नेता जीवंत और उत्साहित नजर आए।
यह यात्रा कांग्रेस के लिए एक संजीवनी साबित हो सकती है। अगर यह यात्रा सफल मानी जाती है, तो यह निश्चित है कि भविष्य में जब महागठबंधन में सीट बंटवारे पर बातचीत होगी, तो कांग्रेस के हौसले बुलंद होंगे और उसकी सौदेबाजी की ताकत बढ़ जाएगी। इस स्थिति में आरजेडी के लिए सीटों के बंटवारे को लेकर चुनौतियां बढ़ सकती हैं।