हलवा सेरेमनी के बाद अधिकारी क्यों ‘लॉक’ हो जाते हैं? बजट का ये राज़ क्या है?…

Ritu Raj

केंद्रीय बजट 2026-27 पेश होने से ठीक पहले, 27 जनवरी 2026 को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने नॉर्थ ब्लॉक में पारंपरिक हलवा सेरेमनी में हिस्सा लिया। यह रस्म हर साल बजट की अंतिम तैयारी का प्रतीक होती है और बजट दस्तावेजों की छपाई शुरू होने का संकेत देती है।

दरअसल, यह समारोह रायसीना हिल्स पर स्थित नॉर्थ ब्लॉक (वित्त मंत्रालय का पुराना परिसर) के बजट प्रेस में आयोजित किया गया, क्योंकि नए कार्यालय में प्रिंटिंग सुविधा नहीं है। वित्त मंत्री ने खुद बड़ी कड़ाही में हलवा को चलाया और फिर बजट तैयार करने वाली टीम के अधिकारियों व कर्मचारियों को परोसा। इसमें आटा या सूजी से बने पारंपरिक हलवे में देसी घी और ड्राई फ्रूट्स मिलाए जाते हैं। हलवा सेरेमनी भारतीय संस्कृति की उस परंपरा का हिस्सा है, जिसमें किसी शुभ कार्य की शुरुआत मीठा बांटकर की जाती है। यह बजट प्रक्रिया के अंतिम चरण की शुरुआत को औपचारिक रूप देती है। समारोह के तुरंत बाद बजट से जुड़े करीब 60-70 अधिकारी ‘लॉक-इन’ पीरियड में चले जाते हैं।

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इस दौरान वे नॉर्थ ब्लॉक के बेसमेंट में ही रहते हैं, बाहर नहीं निकल सकते, परिवार या किसी से संपर्क नहीं कर सकते। मोबाइल फोन, इंटरनेट और अन्य संचार साधनों पर पूरी पाबंदी रहती है। सीसीटीवी और सुरक्षा एजेंसियों की सतत निगरानी होती है, ताकि बजट की कोई जानकारी लीक न हो सके। दरअसल, यह गोपनीयता की परंपरा 1950 के दशक में शुरू हुई, जब बजट लीक होने की एक घटना हुई थी। तब से यह रस्म चली आ रही है, भले ही अब बजट प्रक्रिया काफी हद तक डिजिटल हो गई हो। हलवा सेरेमनी बजट पेश होने (1 फरवरी 2026) से कुछ दिन पहले की जाती है और यह बजट की उल्टी गिनती शुरू करने का प्रतीक मानी जाती है।

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