सिटी पोस्ट लाइव : नीट पेपर लीक कांड का मुख्य साजिशकर्ता संजीव मुखिया ने दो दिनों की पूछताछ के दौरान बड़े बड़े सनसनीखेज खुलासे किये हैं.पूछताछ के बाद उसे EOU ने एक बार फिर न्यायिक हिरासत में बेउर जेल भेज दिया है. EOU के एडीजी नैय्यर हसनैन ख़ान ने बताया कि पूछताछ के दौरान संजीव मुखिया ने कई चौंकाने वाले खुलासे किए हैं, जिससे इस पूरे घोटाले की जड़ें और गहराई तक सामने आ रही हैं.
संजीव मुखिया ने कबूल किया है कि उसने पूरे सिस्टम को अपने हिसाब से ‘मोल्ड’ किया था, ताकि वह पेपर लीक जैसे अपराध को अंजाम दे सके. उसका उद्देश्य केवल अवैध तरीके से पैसे कमाना नहीं, बल्कि अपनी पत्नी को राजनीति में स्थापित करना था. उसने यह नेटवर्क खड़ा ही इसलिए किया था कि उसकी पत्नी को पहले विधायक (MLA) और फिर सांसद (MP) बनाया जा सके.
संजीव मुखिया का नेटवर्क सिर्फ बिहार तक सीमित नहीं था, बल्कि झारखंड, उत्तर प्रदेश, गुजरात, दिल्ली और कोलकाता तक फैला हुआ था. इन राज्यों में भी उसने पेपर लीक और अन्य आपराधिक गतिविधियों के जरिए एक संगठित गिरोह खड़ा किया था.ईओयू ने इन खुलासों के बाद संबंधित राज्यों, उत्तर प्रदेश, झारखंड, दिल्ली, गुजरात और पश्चिम बंगाल की पुलिस को भी मामले की जानकारी साझा की है. उनसे संजीव मुखिया के खिलाफ दर्ज मामलों की जांच में सहयोग मांगा है.
गौरतलब है कि संजीव मुखिया का नाम कई प्रतियोगी परीक्षाओं के पेपर लीक में सामने आ चुका है. ईओयू इस पूरे नेटवर्क को ध्वस्त करने के लिए अब कई राज्यों में समन्वय के साथ कार्रवाई की योजना बना रही है.आर्थिक अपराध इकाई (EOU) की पूछताछ में कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं.पूछताछ में संजीव मुखिया ने बताया कि “हम लोगों का बहुत बड़ा नेटवर्क है. इस चेन ऑफ सिस्टम में पहले नंबर पर मैं और मेरे कुछ करीबी लोग हैं. दूसरे नंबर पर रॉकी, मेरा बेटा डॉ. शिव और उसके कुछ साथी शामिल हैं.उसने यह भी बताया कि पेपर प्रिंटिंग प्रक्रिया में तीन लॉक होते हैं, जिनमें से परीक्षा केंद्र को केवल दो लॉक की जानकारी होती है. तीसरे लॉक की जानकारी केवल इनके नेटवर्क को होती है. वे पहले दोनों लॉक खोलकर पेपर हासिल कर लेते थे और फिर तीसरे लॉक को लगाकर पेपर को उसी स्थान पर वापस भेज देते थे.
मुखिया ने यह कबूला कि इसी सिस्टम का इस्तेमाल उन्होंने NEET, BPSC, यूपी सिपाही भर्ती और बिहार सिपाही भर्ती में किया था.संजीव मुखिया ने बताया कि उसने अपने इलाके के छात्रों के साथ-साथ कई नेताओं और अधिकारियों के बच्चों को मेडिकल परीक्षा पास करवाई, जिससे वह भविष्य में उन्हें ‘ऑब्लाइज’ कर सके. उसने यह भी कहा कि उसकी पत्नी पिछली विधानसभा चुनाव में लोजपा (LJP) से चालीस सीट से चुनाव लड़ी थी, लेकिन केवल साढ़े तीन हजार वोटों से हार गई. अगर वह निर्दलीय लड़ी होती, तो जीत जाती, इस बात का उसे अफसोस है.