अनंत सिंह वर्तमान में दुलारचंद यादव हत्याकांड जैसे गंभीर मामले में जेल में बंद हैं। उन पर हत्या (BNS की धारा 103) का आरोप है, जिसमें दोषी सिद्ध होने पर उम्रकैद या फांसी तक की सजा हो सकती है। इसके अलावा उन पर 28 अन्य आपराधिक मामले लंबित हैं। 64 वर्ष की आयु पार कर चुके अनंत सिंह जानते हैं कि लंबी कानूनी लड़ाई और जेल की अनिश्चितता के बीच सक्रिय राजनीति करना कठिन होगा। अगले चुनाव (2030) तक वह करीब 69 वर्ष के हो जाएंगे, इसलिए वह समय रहते अपने 25 वर्षीय जुड़वा बेटों (अंकित और अभिषेक) को ‘सेकंड लाइन’ लीडरशिप के तौर पर तैयार कर रहे हैं।

‘रॉबिनहुड’ छवि और क्षेत्र पर पकड़ बरकरार रखना;
मोकामा और उसके आस-पास के आधा दर्जन से अधिक विधानसभा क्षेत्रों (बाढ़, लखीसराय, सूर्यगढ़ा आदि) पर पिछले 35 वर्षों से अनंत सिंह के परिवार का दबदबा है। अनंत सिंह ने अपनी छवि एक ‘रॉबिनहुड’ नेता की बनाई है, जिसे युवाओं और विभिन्न वर्गों का समर्थन प्राप्त है। वह नहीं चाहते कि जेल में रहने के कारण उनके प्रभाव का यह किला ढह जाए। बेटों को राजनीति में लाकर वह न केवल अपनी विरासत सुरक्षित करना चाहते हैं, बल्कि उनकी ‘सॉफ्ट’ और शिक्षित इमेज (लंदन और एमिटी से पढ़ाई) के जरिए नए और मध्यम वर्गीय मतदाताओं को भी जोड़ना चाहते हैं।

भविष्य की राजनीतिक सुरक्षा और संरक्षण;
बिहार की राजनीति में सत्ता का साथ होना किसी भी बाहुबली नेता के लिए सबसे बड़ा कवच होता है। अनंत सिंह बखूबी जानते हैं कि यदि उनके परिवार का कोई सदस्य (बेटा) विधायक बनकर सदन में बैठता है, तो शासन-प्रशासन और पार्टी नेतृत्व (JDU/NDA) से उनका सीधा संपर्क बना रहेगा। यह राजनीतिक रसूख उनके कठिन समय में ‘सुरक्षा कवच’ का काम करेगा। यही कारण है कि वह खुद पीछे हटकर अपने शिक्षित बेटों को नीतीश कुमार और ललन सिंह जैसे बड़े नेताओं से मिलवाकर उनके राजनीतिक भविष्य की नींव रख रहे हैं।