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राजधानी पटना के सिविल कोर्ट में बुधवार को उस वक्त हड़कंप मच गया जब एक सनसनीखेज ई-मेल के जरिए कोर्ट परिसर को बम से उड़ाने की धमकी दी गई। इस धमकी का सबसे बड़ा असर कानूनी कार्यवाही पर पड़ा है। पूर्णिया से लोकसभा सांसद पप्पू यादव (Pappu Yadav) की महत्वपूर्ण सुनवाई इसी वजह से टल गई, जिसके कारण उन्हें राहत नहीं मिल सकी और अब उनकी रात जेल में ही कटेगी।
ई-मेल में ‘दोपहर 1 बजे’ का अल्टीमेटम
बुधवार की सुबह पटना, दानापुर और किशनगंज सिविल कोर्ट के आधिकारिक मेल आईडी पर एक धमकी भरा संदेश प्राप्त हुआ। इस मेल में स्पष्ट रूप से चेतावनी दी गई थी कि ठीक दोपहर 1 बजे कोर्ट परिसर के भीतर पांच सिलसिलेवार बम धमाके किए जाएंगे। धमकी भरे इस संदेश के अंत में कुछ बेहद आपत्तिजनक नारे भी लिखे गए थे, जिससे सुरक्षा एजेंसियों के कान खड़े हो गए।
पूरा परिसर सील, वकीलों निकाला गया बाहर
जैसे ही धमकी की खबर फैली, कोर्ट परिसर में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। पुलिस प्रशासन ने बिना देरी किए एहतियातन पूरे व्यवहार न्यायालय परिसर को खाली कराने का आदेश दिया। मुख्य द्वारों को तुरंत सील कर दिया गया और अंदर मौजूद सैकड़ों अधिवक्ताओं और मुवक्किलों को बाहर निकाला गया। मौके पर बम निरोधक दस्ता (BDDS), डॉग स्क्वायड और भारी संख्या में पुलिस बल तैनात कर दिया गया।
सांसद पप्पू यादव को नहीं मिली राहत
सांसद पप्पू यादव से जुड़े एक मामले में आज पटना सिविल कोर्ट में अहम सुनवाई होनी थी। उनके समर्थक और कानूनी टीम बड़ी उम्मीद के साथ कोर्ट पहुंचे थे, लेकिन सुरक्षा कारणों और कोर्ट परिसर के खाली कराए जाने के कारण न्यायाधीश ने कार्यवाही को स्थगित कर दिया। सुनवाई टलने का सीधा अर्थ यह है कि पप्पू यादव को फिलहाल जेल में ही रहना होगा।
छठी बार मिली धमकी, प्रशासन पर उठे सवाल
हैरानी की बात यह है कि पटना सिविल कोर्ट को बम से उड़ाने की यह छठी बार धमकी मिली है। बार-बार मिल रही इन धमकियों के बावजूद अब तक पुलिस किसी ठोस नतीजे पर नहीं पहुंच सकी है। इस पर अधिवक्ताओं ने भारी नाराजगी व्यक्त की है। बार एसोसिएशन के सदस्यों का कहना है कि बार-बार काम रुकने से न केवल न्याय में देरी हो रही है, बल्कि वकीलों और न्यायाधीशों की जान भी जोखिम में है।
पटना पुलिस की साइबर सेल अब उस ई-मेल के आईपी एड्रेस (IP Address) को ट्रैक करने में जुटी है। अधिकारियों का कहना है कि यह किसी शरारती तत्व की साजिश हो सकती है, लेकिन सुरक्षा के साथ कोई समझौता नहीं किया जा सकता।