मुजफ्फरपुर: जिले के सकरा प्रखंड स्थित उच्च माध्यमिक विद्यालय रायपुर (मुरा हरलोचनपुर) बुधवार को किसी छावनी या अस्पताल जैसा मंजर पेश करने लगा। स्कूल की कक्षाएं उस वक्त चीख-पुकार में बदल गईं, जब एक-एक कर कई छात्राएं अचानक जमीन पर गिरकर बेहोश होने लगीं। इस रहस्यमयी घटना ने न केवल स्कूल प्रशासन के हाथ-पांव फुला दिए, बल्कि पूरे इलाके में सनसनी फैला दी।
क्लासरूम में कोहराम और ‘दो राहे’ पर समाज;
जैसे ही छात्राएं बेहोश हुईं, स्कूल परिसर में भगदड़ मच गई। शिक्षकों ने आनन-फानन में बच्चों को उनके घर भिजवाया, लेकिन इसके बाद जो हुआ वह आधुनिक समाज की दोहरी तस्वीर पेश करता है। जहाँ कुछ जागरूक परिजन बेटियों को लेकर डॉक्टर के पास भागे, वहीं कई परिवारों ने अस्पताल की जगह ‘ओझा-गुनी’ का रास्ता चुना। घर-घर में कहीं दवा चल रही थी, तो कहीं झाड़-फूंक और टोना-टोटका का दौर शुरू हो गया। किसी ने इसे बीमारी कहा, तो किसी ने इसे ‘अदृश्य साये’ का नाम दे दिया।
अंधविश्वास या प्रशासनिक लापरवाही?
इस घटना के पीछे स्थानीय ग्रामीण एक गंभीर वजह बता रहे हैं। आरोप है कि स्कूल के पास कुछ दबंगों ने अवैध कब्जा कर रखा है, जहाँ मवेशी बांधे जाते हैं। चारों तरफ फैली गंदगी, सड़ांध और बदबू के कारण वातावरण जहरीला हो चुका है। ग्रामीणों का मानना है कि इसी संक्रमण और गंदगी की वजह से छात्राएं Mass Hysteria या संक्रमण का शिकार हुई हैं। यह पहली बार नहीं है, इससे पहले भी यहाँ ऐसी घटनाएं हो चुकी हैं, लेकिन प्रशासन की नींद अब तक नहीं खुली है।

सिस्टम पर सवालिया निशान;
21वीं सदी के डिजिटल इंडिया में एक सरकारी स्कूल के भीतर ऐसी घटना और उसके बाद झाड़-फूंक का सहारा लेना कई सवाल खड़े करता है:
1) क्या स्कूल परिसर में फैली गंदगी छात्राओं की सेहत पर भारी पड़ रही है?
2) दबंगों के अवैध कब्जे पर शिक्षा विभाग मौन क्यों है?
3) क्या स्वास्थ्य विभाग गाँव में जागरूकता कैंप लगाकर अंधविश्वास को खत्म करने की कोशिश करेगा?
मुजफ्फरपुर की यह घटना केवल एक स्वास्थ्य संबंधी आपातकाल नहीं है, बल्कि यह हमारे सिस्टम की जर्जर हालत और समाज में गहरे बैठे अंधविश्वास का आईना भी है।