सियासत से दूर रहने वाले निशांत कुमार अब ‘लाइमलाइट’ में, क्या जेडीयू में होने जा रहा है कोई बड़ा बदलाव?…

Ritu Raj

शुक्रवार, 23 जनवरी 2026 को पटना स्थित जेडीयू आईटी सेल का कार्यालय केवल तकनीक का केंद्र नहीं, बल्कि आस्था और कूटनीति के संगम का गवाह बना। अवसर था सरस्वती पूजा का, जहाँ मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने विद्या की देवी के समक्ष माथा टेका। हालांकि, इस बार चर्चा का विषय केवल आरती और प्रसाद नहीं था। राजनीतिक गलियारों में असली हलचल मुख्यमंत्री के बेटे निशांत कुमार की सक्रिय मौजूदगी से शुरू हुई।

कार्यक्रम में निशांत कुमार मुख्यमंत्री से पहले ही पहुंच चुके थे। जैसे ही नीतीश कुमार वहां पहुंचे, उन्होंने बेटे से सामान्य अंदाज में पूछा, “तुम कब आए हो?” निशांत ने मुस्कुराते हुए जवाब दिया कि आधा घंटा हो गया है। यह छोटा-सा पिता-पुत्र का संवाद मंच पर मौजूद लोगों के लिए काफी यादगार बन गया। इस दौरान केंद्रीय मंत्री और जेडीयू सांसद ललन सिंह ने निशांत की पीठ पर हाथ रखकर मजाकिया लहजे में नीतीश कुमार से कहा, “बोल दीजिए कि मानेंगे… अब इन्हें राजनीति में आने दीजिए।” इस पर दोनों पिता-पुत्र मुस्कुराए, लेकिन किसी ने भी स्पष्ट जवाब नहीं दिया। यही मुस्कान और खामोशी अब सियासी अर्थों में देखी जा रही है। नीतीश कुमार की राजनीति में परिवारवाद से दूरी रही है। उन्होंने कभी भी बेटे को आगे नहीं बढ़ाया और जेडीयू को परिवार-केंद्रित राजनीति से अलग रखा। लेकिन अब पार्टी के भीतर उत्तराधिकार को लेकर चर्चाएं तेज हैं। कई वरिष्ठ नेता निशांत को भविष्य का चेहरा मानते हैं, क्योंकि कोई दूसरा सर्वमान्य उत्तराधिकारी अभी उभर नहीं पाया है।

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कार्यक्रम के बाद मीडिया से बात करते हुए निशांत ने संक्षिप्त में कहा कि वे और उनके पिता दोनों मां सरस्वती का आशीर्वाद लेने आए हैं। इस बयान से उन्होंने राजनीतिक अटकलों से दूरी बनाए रखने की कोशिश की, लेकिन जानकार इसे भी एक रणनीतिक चुप्पी मान रहे हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यह सब संयोग नहीं, बल्कि एक तरह का सॉफ्ट लॉन्च हो सकता है। निशांत की बार-बार पार्टी कार्यक्रमों में मौजूदगी, कार्यकर्ताओं का उत्साह और ललन सिंह जैसे नेताओं के खुले संकेत—सब मिलकर बिहार की राजनीति में नए अध्याय की ओर इशारा करते हैं। हालांकि अभी कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है, लेकिन यह घटना जेडीयू में युवा चेहरे की जरूरत को रेखांकित करती है, खासकर एनडीए को मजबूत करने के लिए। क्या निशांत कुमार राजनीति में कदम रखेंगे? या नीतीश किसी और को चुनेंगे? आने वाले समय में यह साफ होगा। फिलहाल, सरस्वती पूजा का यह मंच धार्मिक से ज्यादा राजनीतिक संदेशों से गूंज रहा है, और सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक गलियारों तक चर्चा का केंद्र बना हुआ है।

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