सिटी पोस्ट लाइव
राजस्व खुफिया निदेशालय (DRI) ने अंतरराष्ट्रीय मादक पदार्थों के बाद अब सोने की तस्करी करने वाले एक बहुत बड़े सिंडिकेट को ध्वस्त कर दिया है। दिल्ली और अगरतला में एक साथ चलाए गए ‘क्लीनअप’ ऑपरेशन में DRI ने 29.2 किलोग्राम विदेशी मूल का सोना बरामद किया है, जिसकी अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत लगभग 40 करोड़ रुपये आंकी गई है। इस कार्रवाई में तस्करों के पास से 2.90 करोड़ रुपये की नकदी (भारतीय और बांग्लादेशी मुद्रा) भी जब्त की गई है।
दुबई से अगरतला और दिल्ली तक का ‘गोल्ड रूट’
DRI की जांच में एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। यह गिरोह बेहद शातिर तरीके से भारत की आर्थिक सीमाओं में सेंध लगा रहा था। जांच के अनुसार, सोने की खेप पहले दुबई से बांग्लादेश पहुँचती थी। वहां से त्रिपुरा स्थित भारत-बांग्लादेश सीमा के रास्ते इसे अवैध रूप से भारत में दाखिल कराया जाता था।

अगरतला में मौजूद स्थानीय आभूषण विक्रेता और एजेंट इस सोने को प्राप्त करते थे और इसे पकड़े जाने से बचाने के लिए ‘घरेलू कार्गो सेवाओं’ (Domestic Cargo) का सहारा लेकर दिल्ली भेज देते थे। कार्गो सेवाओं के जरिए इसे आम सामान की तरह दिल्ली के बड़े डीलरों तक पहुँचाया जाता था।
खुफिया जानकारी और ताबड़तोड़ छापेमारी
DRI को विशिष्ट खुफिया जानकारी मिली थी कि अगरतला से दिल्ली के लिए सोने की दो बड़ी खेप भेजी गई हैं। मंगलवार को जब गिरोह का एक मुख्य सदस्य दिल्ली के एक लॉजिस्टिक्स गोदाम से इन खेपों की डिलीवरी ले रहा था, तभी अधिकारियों ने उसे रंगे हाथों दबोच लिया।
पहली बरामदगी: गोदाम से 15 किलोग्राम सोना मिला, जिसकी कीमत 20.73 करोड़ रुपये थी।

दूसरी कार्रवाई: दिल्ली और अगरतला के विभिन्न ठिकानों पर एक साथ हुई छापेमारी में 14.2 किलोग्राम अतिरिक्त सोना और भारी मात्रा में नकदी बरामद हुई।
चार गिरफ्तार, अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क रडार पर
इस मामले में अब तक गिरोह के चार प्रमुख सदस्यों को गिरफ्तार किया जा चुका है। अधिकारियों का मानना है कि यह गिरोह न केवल भारत की अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुँचा रहा था, बल्कि अवैध विदेशी मुद्रा के लेन-देन में भी शामिल था। बरामद सोने पर अंतरराष्ट्रीय रिफाइनरी के स्पष्ट निशान (Markings) पाए गए हैं, जो इसके विदेशी मूल का होने की पुष्टि करते हैं।
DRI ने सीमा शुल्क अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर जांच तेज कर दी है। अब एजेंसी उन ‘बड़े नामों’ की तलाश कर रही है जो दुबई और बांग्लादेश में बैठकर इस पूरे नेटवर्क को फंड कर रहे थे।