मुजफ्फरपुर में हुए पप्पू सहनी एनकाउंटर मामले ने अब राजनीतिक तूल पकड़ लिया है। विकासशील इंसान पार्टी (VIP) के प्रमुख मुकेश सहनी ने इस मुठभेड़ को ‘फर्जी’ करार देते हुए बिहार सरकार और पुलिस प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।

मुकेश सहनी के आरोप;
मुकेश सहनी ने अपने समर्थकों के साथ एसएसपी कार्यालय पहुंचकर विरोध दर्ज कराया। उन्होंने दावा करते हुए कहा कि पप्पू सहनी पिछले 3-4 वर्षों से मुख्यधारा में लौट चुका था और चाय की दुकान चलाकर जीवन यापन कर रहा था। पुलिस उसे बेवजह प्रताड़ित कर रही थी और उससे पैसों की उगाही की जा रही थी। सहनी का आरोप है कि पुलिस ने उसे गोली मारने के बाद समय पर इलाज नहीं कराया और मरने के लिए छोड़ दिया। उन्होंने एसएसपी से निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए 1 महीने का समय दिया है। यदि न्याय नहीं मिला, तो उन्होंने बड़े आंदोलन की चेतावनी दी है। बयान में उन्होंने कहा कि “बिहार में मुंबई जैसी ‘फर्जी एनकाउंटर’ संस्कृति स्वीकार्य नहीं है। अगर वह दोषी था, तो सबूत पेश किए जाने चाहिए थे।”

पुलिस का पक्ष;
पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, 17 फरवरी को बेला थाना क्षेत्र में हुई घटना की कहानी अलग है। पुलिस जब पप्पू सहनी को पकड़ने गई, तो उसने फायरिंग शुरू कर दी। इस दौरान बेला थाने के ASI विकास कुमार के पेट में गोली लगी। वहीं, आत्मरक्षा में की गई फायरिंग में पप्पू सहनी के पैर में गोली लगी। बाद में स्थानीय लोगों की मदद से उसे पकड़ा गया, लेकिन इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। एसएसपी कांतेश कुमार मिश्रा के अनुसार, पप्पू पर मुजफ्फरपुर में करीब एक दर्जन और उत्तर बिहार के विभिन्न जिलों में एटीएम फ्रॉड के लगभग 50 मामले दर्ज थे। बता दें, घटनास्थल से हथियार और कई एटीएम कार्ड बरामद किए गए थे।