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नई दिल्ली। रेलवे भर्ती परीक्षा में भ्रष्टाचार और पेपर लीक के मामलों पर शिकंजा कसते हुए केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने एक बड़ी कार्रवाई की है। सीबीआई ने पूर्व मध्य रेलवे में आयोजित विभागीय परीक्षा के प्रश्न पत्र लीक मामले में 26 रेलवे अधिकारियों और कर्मचारियों को गिरफ्तार किया है। इस घोटाले का खुलासा 3-4 मार्च 2025 की रात को हुई छापेमारी के दौरान हुआ, जिसमें 1.17 करोड़ रुपये नकद जब्त किए गए। यह राशि कथित रूप से प्रश्न पत्र लीक करने के बदले वसूली गई थी।
रेलवे में बड़े पदों पर प्रमोशन के लिए आयोजित इस परीक्षा के दौरान हुए गड़बड़झाले ने रेलवे विभाग को हिला कर रख दिया है। सीबीआई की टीम ने उत्तर प्रदेश, बिहार और अन्य कई राज्यों में छापेमारी की और इस पूरे रैकेट को उजागर किया। अधिकारियों ने बताया कि इस लीक में रेलवे के उच्च अधिकारियों के अलावा अन्य कर्मचारियों की मिलीभगत थी, जो परीक्षा से पहले ही उम्मीदवारों को प्रश्न पत्र उपलब्ध करवा रहे थे।
कैसे हुआ पेपर लीक?
पूर्व मध्य रेलवे द्वारा 4 मार्च 2025 को मुख्य लोको निरीक्षक (Chief Loco Inspector) के पदों के लिए विभागीय परीक्षा आयोजित की जानी थी। यह परीक्षा उन लोको पायलटों (Loco Pilots) और सहायक लोको पायलटों (Assistant Loco Pilots) के लिए थी, जो प्रमोशन के माध्यम से उच्च पद पर आना चाहते थे। सीबीआई की जांच में सामने आया कि रेलवे के एक सीनियर अधिकारी ने इस परीक्षा के प्रश्न पत्र को लीक कर दिया था। इस पूरे मामले में एक सीनियर डिविजनल इलेक्ट्रिकल इंजीनियर (Senior DEE – Ops) मुख्य साजिशकर्ता था। उसके पास प्रश्न पत्र तैयार करने की जिम्मेदारी थी, लेकिन उसने इसे गुप्त रूप से लीक कर दिया।
ऐसे रची गयी थी पेपर लीक की पूरी साजिश
- सीनियर डीईई (ऑप्स) ने खुद प्रश्न पत्र तैयार किया और उसे अपने हाथ से अंग्रेजी में लिखा।
- उसके बाद, उसने यह प्रश्न पत्र एक लोको पायलट को दिया, जिसने इसका हिंदी में अनुवाद किया।
- इसके बाद यह प्रश्न पत्र एक ओएस (ट्रेनिंग) को सौंपा गया, जिसने इसे अन्य रेलवे कर्मचारियों के माध्यम से उम्मीदवारों तक पहुंचा दिया।
- उम्मीदवारों से मोटी रकम वसूल कर परीक्षा से पहले ही उन्हें प्रश्न पत्र दे दिया गया।
छापेमारी में हुआ बड़ा खुलासा
सीबीआई ने गुप्त सूचना के आधार पर इस पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश किया। 3-4 मार्च की रात, उत्तर प्रदेश, बिहार और अन्य स्थानों पर एक साथ छापेमारी की गई। मुगलसराय में तीन अलग-अलग स्थानों पर तलाशी के दौरान, 17 उम्मीदवारों के पास परीक्षा के प्रश्नों की फोटोकॉपी बरामद हुई। इन सभी उम्मीदवारों को रंगे हाथों पकड़ लिया गया और तत्काल गिरफ्तार कर लिया गया। इस मामले में मुख्य आरोपी सीनियर डीईई (ऑप्स) और अन्य रेलवे अधिकारियों को भी गिरफ्तार कर लिया गया। सीबीआई अधिकारियों ने बताया कि जब्त की गई राशि उन उम्मीदवारों से वसूली गई थी, जिन्होंने प्रश्न पत्र खरीदकर परीक्षा में शामिल होने की योजना बनाई थी।
CBI की अब तक की कार्रवाई
- कुल 26 रेलवे अधिकारियों और कर्मचारियों की गिरफ्तारी।
- 1.17 करोड़ रुपये नकद जब्त किए गए।
- 8 अलग-अलग स्थानों पर तलाशी ली गई।
- 17 उम्मीदवारों को प्रश्न पत्र के साथ पकड़ा गया।
- मुख्य आरोपी सीनियर डीईई (ऑप्स) सहित कई अन्य रेलवे अधिकारी शामिल पाए गए।
पहले भी कई परीक्षाओं में हुई हैं गड़बड़ियां
यह कोई पहली बार नहीं है जब रेलवे भर्ती परीक्षाओं में भ्रष्टाचार और धांधली का मामला सामने आया है। इससे पहले भी कई बार पेपर लीक और फर्जीवाड़े के मामलों में बड़े अधिकारियों और दलालों की मिलीभगत उजागर हुई है। रेलवे भर्ती बोर्ड (RRB) की परीक्षाओं में भी कई बार प्रश्न पत्र लीक होने, फर्जी उम्मीदवारों की भर्ती और भारी घूसखोरी की घटनाएं सामने आई हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के भ्रष्टाचार से योग्य उम्मीदवारों के भविष्य से खिलवाड़ होता है और इससे रेलवे की प्रतिष्ठा को भी गहरा नुकसान पहुंचता है।
अभी भी जारी है जांच
महत्वपूर्ण दस्तावेजों की बरामदगी के बाद, सीबीआई अधिकारियों ने पुष्टि की कि जब्त किए गए प्रश्न पत्र पूरी तरह से वास्तविक परीक्षा प्रश्नों से मेल खाते हैं। प्रेस कॉन्फ्रेंस में सीबीआई प्रवक्ता ने बताया कि हमने परीक्षा से पहले प्रश्न पत्र लीक करने और इसे उम्मीदवारों तक पहुंचाने की पूरी साजिश का पर्दाफाश किया है। सभी साक्ष्य हमारे पास मौजूद हैं। आगे की जांच जारी है, और अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी भी जल्द की जाएगी।
सीबीआई ने यह भी संकेत दिया है कि इस मामले में और भी गिरफ्तारियां हो सकती हैं। एजेंसी इस बात की जांच कर रही है कि क्या इस भ्रष्टाचार में और भी बड़े अधिकारी शामिल थे। इस खुलासे के बाद रेलवे विभाग और अन्य सरकारी भर्ती परीक्षाओं की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। सीबीआई की इस कार्रवाई को भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता लाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। सरकार की ओर से भी भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए कड़े कदम उठाने की बात कही जा रही है।